18,600 फीट ऊंचाई पर रेस्क्यू: तेज हवाओं और खड़ी ढलान में सेना ने बिना उतरे एक स्किड पर हेलिकॉप्टर टिकाकर, मरीज को सुरक्षित निकालकर, साहसिक कारनामा कर दिखाया।
ऊंचाई पर रेस्क्यू
लद्दाख। ऊंचाई पर रेस्क्यू का यह मिशन भारतीय सेना के एविएशन पायलटों ने नुन कुन के पास 18,600 फीट की ऊंचाई पर अंजाम दिया। तेज पहाड़ी हवाओं, बेहद खड़ी ढलान और हेलिकॉप्टर उतारने की जगह नहीं होने के बावजूद पायलटों ने घायल व्यक्ति को निकाल लिया। मिशन के दौरान समय भी बेहद कम था, क्योंकि दिन की आखिरी उपलब्ध लैंडिंग विंडो तेजी से बंद हो रही थी। एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह ऑपरेशन सेना की तकनीकी दक्षता और साहस का बड़ा उदाहरण है। [1]
18,600 फीट पर हवा बेहद पतली होती है, जिससे हेलिकॉप्टर के इंजन और रोटर की क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे हालात में यह अभियान सामान्य उड़ान से कहीं ज्यादा जोखिम भरा था। पायलटों ने उड़ान से पहले हेलिकॉप्टर को हल्का किया और गैर जरूरी उपकरण हटा दिए। इसके अलावा सीमित ईंधन ही साथ रखा गया, ताकि मशीन की उठाने की क्षमता बेहतर रहे और मरीज को सुरक्षित निकालने के लिए जरूरी प्रदर्शन बचा रहे और वापसी के लिए पर्याप्त नियंत्रण भी बना रहे।
मरीज तक पहुंचने के बाद सबसे बड़ी चुनौती सामने थी। तेज हवाओं के बीच ढलान इतनी खड़ी थी कि हेलिकॉप्टर के उतरने के लिए सामान्य जगह मौजूद नहीं थी। पायलटों ने मशीन को बेहद कम ऊंचाई पर स्थिर रखा और एक स्किड को ढलान से टिकाकर तकनीकी लैंडिंग की। इस दौरान मरीज को तेजी से हेलिकॉप्टर में सुरक्षित किया गया। ऊंचाई पर रेस्क्यू का यह तरीका बेहद जोखिम भरा था, क्योंकि छोटी सी चूक भी मिशन को गंभीर खतरे में डाल सकती थी।
यह ऑपरेशन दिन के आखिरी उपलब्ध लैंडिंग विंडो में किया गया, इसलिए हर पल बेहद अहम था। मरीज को सुरक्षित लेने के बाद हेलिकॉप्टर ने वहां से उड़ान भरी और नीचे की ओर सुरक्षित उतर गया। सेना के मुताबिक, इस अभियान ने कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में एविएशन दल की तैयारी, तकनीकी क्षमता और मानवीय जिम्मेदारी को सामने रखा। नुन कुन के पास हुआ यह ऊंचाई पर रेस्क्यू मिशन बताता है कि जान बचाने के लिए पायलटों ने सीमित ईंधन और तेज हवाओं के बीच भी जोखिम उठाया।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। अभियान से जुड़े परिचालन विवरण उपलब्ध आधिकारिक और समाचार स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं और इनमें परिस्थितियों के अनुसार बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।