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नेपाल की बाढ़ से बचाव, ओणम की छुट्टी में गए थे, लौटे तो आंखों में खौफ

नेपाल की बाढ़ से बचाव के बाद 36 सदस्यीय मलयाली दल सुरक्षित केरल लौटा। यात्रियों ने नदी का जलस्तर अचानक तीन गुना बढ़ने और पेड़ उखड़ने का खौफ बताया।

By अजय त्यागी 1 min read
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नेपाल की बाढ़ से बचाव

नेदुंबस्सेरी, केरल। नेपाल की बाढ़ से बचाव के बाद 36 सदस्यीय मलयाली समूह सुरक्षित केरल लौट आया है। नेपाल में अचानक आई बाढ़ के दौरान यह दल बेहद डरावने हालात में फंस गया था। भारत लौटने के लिए समूह के सदस्यों ने नेपाल सीमा पार करने के बाद गोरखपुर एयरपोर्ट का रास्ता अपनाया, जबकि 5 सदस्य बेंगलुरु के रास्ते केरल पहुंचे। अरपूक्करा निवासी रंजिता विनायकुमार ने बताया कि नदी कुछ ही मिनटों में सामान्य स्तर से 3 गुना तक बढ़ गई और पेड़ उखड़कर बहते दिखाई दिए। [विडियो]

नदी ने बदला रूप

रंजिता के मुताबिक हालात इतने तेजी से बदले कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते नदी का पानी कई गुना बढ़ गया और आसपास के पेड़ जड़ से उखड़ने लगे। उन्होंने नेपाल की बाढ़ के इस मंजर को बेहद डरावना बताया और कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में इससे पहले ऐसा कुछ नहीं देखा था। समूह ओणम की छुट्टियां मनाने नेपाल गया था और जिस दिन यह घटना हुई वह तिरुवोनम का दिन था। इसी वजह से यह यात्रा अब उनके लिए जिंदगी भर की डरावनी याद बन गई है।

यात्रियों के लिए सबसे ज्यादा झकझोर देने वाली बात यह रही कि जिस यात्रा को परिवार और दोस्तों के साथ खुशी के पल बिताने के लिए शुरू किया गया था, वह अचानक जान बचाने की जद्दोजहद में बदल गई। नेपाल में आई फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई और यात्रियों को सुरक्षित रास्ता तलाशना पड़ा। 36 सदस्यीय मलयाली दल के सुरक्षित लौटने से परिवारों ने राहत की सांस ली। इससे पहले भी इस समूह के फंसे होने की खबर सामने आने पर केरल में उनके परिजन चिंता में थे।

रास्ता भी आसान नहीं

नेपाल से वापसी के दौरान समूह को सामान्य यात्रा की तरह सीधा रास्ता नहीं मिला। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यात्रियों को नेपाल सीमा पार कर गोरखपुर के रास्ते भारत लौटना पड़ा, जबकि 5 सदस्य बेंगलुरु के जरिए वापस पहुंचे। इससे पहले भी दूसरे मलयाली यात्रियों ने नेपाल में बाढ़ के बाद सड़कों और पुलों को प्रभावित होते देखने की जानकारी दी थी। कई समूहों को अपने तय यात्रा कार्यक्रम बदलने पड़े और सुरक्षित इलाकों की ओर जाना पड़ा। प्राकृतिक आपदा ने नेपाल में घूमने गए भारतीय यात्रियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी।

रंजिता विनायकुमार ने कहा कि उन्हें भगवान की कृपा से दोबारा जिंदा लौटने का मौका मिला। उनके मुताबिक इस घटना को वह कभी नहीं भूल पाएंगी। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच सुरक्षित निकलना इस समूह के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। नेपाल की बाढ़ से बचाव के बाद जब यात्री केरल लौटे तो उनके चेहरों पर राहत साफ नजर आई, लेकिन नदी के अचानक विकराल रूप और पेड़ों के उखड़ने का खौफ अभी भी उनकी यादों में ताजा है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। आपदा और यात्रा से संबंधित विवरण यात्रियों के बयानों तथा उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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