चीन के रोबोट सैनिक भविष्य के युद्ध की तस्वीर बदल सकते हैं। PLA ने AI और रोबोटिक्स को सैन्य ताकत में बदलने की तैयारी तेज की। भारत को भी समय रहते चेतने की जरुरत।
प्रतीकात्मक फोटो
चीन। चीन के रोबोट सैनिक अब सिर्फ विज्ञान कथा का हिस्सा नहीं रह गए हैं बल्कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की भविष्य की सैन्य तैयारी में AI और रोबोटिक्स को अहम जगह मिलती दिख रही है। PLA Daily में प्रकाशित लेख में AI और रोबोटिक्स को सैन्य विकास की क्रांतिकारी ताकत बताते हुए उन्हें युद्धक क्षमता में बदलने पर जोर दिया गया है। लेख में सैन्य जरूरतों और तकनीकी शोध को जोड़कर ऐसे रोबोट विकसित करने की बात कही गई है जो युद्ध के बदलते माहौल में उपयोगी साबित हो सकें। [1]
चीन के रोबोट सैनिक की अवधारणा को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि PLA केवल मानवरूपी मशीनों पर निर्भर रहने की बात नहीं कर रही है। ड्रोन, चार पैरों वाले रोबोट, मानवरूपी मशीनें और AI आधारित स्वायत्त सिस्टम भविष्य में सैनिकों के साथ काम कर सकते हैं। चीन के सैन्य प्रकाशनों में भी मानव रहित प्रणालियों और AI आधारित युद्धक क्षमता को भविष्य के युद्ध का अहम हिस्सा बताया गया है। इसका मतलब यह है कि इंसान और मशीन मिलकर निगरानी, रसद और जोखिम वाले अभियानों में भूमिका निभा सकते हैं।
लेकिन अभी इन मशीनों को सीधे युद्ध के अग्रिम मोर्चे पर उतारना आसान नहीं है। मानवरूपी रोबोटों के सामने ऊर्जा क्षमता, विश्वसनीयता, कठिन जमीन पर संचालन और लंबे समय तक स्वायत्त काम करने जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा तकनीक में रोबोटों का इस्तेमाल पहले खतरनाक या दोहराव वाले कामों, निरीक्षण, रखरखाव और रसद जैसे क्षेत्रों में बढ़ सकता है। यानी आने वाले समय में सैनिकों को पूरी तरह बदलने के बजाय मशीनों के साथ मिलकर काम करने वाला मॉडल ज्यादा व्यावहारिक दिखाई देता है।
चीन के रोबोट सैनिकों से जुड़ी सबसे बड़ी चिंता सिर्फ एक नई मशीन बनाने की क्षमता नहीं बल्कि देश की विशाल विनिर्माण व्यवस्था है। चीन ने मानवरूपी रोबोट के उत्पादन और AI तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। उद्योग में तेजी से बढ़ती उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल भविष्य में सैन्य जरूरतों के लिए भी किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बड़ी आपूर्ति श्रृंखला, हार्डवेयर निर्माण क्षमता और AI क्षेत्र में तेजी उसे सैन्य रोबोटिक्स की दौड़ में महत्वपूर्ण बढ़त दे सकती है।
PLA इससे पहले भी मानवरूपी रोबोट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकों को भविष्य के युद्ध से जोड़ चुकी है। आधिकारिक सैन्य विश्लेषणों में ऐसे सिस्टम को युद्धक्षेत्र में खुद स्थिति समझने, निर्णय लेने और कार्रवाई करने की क्षमता से जोड़ा गया है। चार पैरों वाले रोबोटों को भी कठिन इलाकों में निगरानी और दूसरे सैन्य कामों के लिए उपयोगी माना गया है। इससे संकेत मिलता है कि चीन अलग अलग तरह की मशीनों को एक साथ जोड़कर व्यापक मानव मशीन सहयोग वाली युद्ध प्रणाली तैयार करने की दिशा में सोच रहा है।
चीन के रोबोट सैनिकों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन्हें जल्द भारत चीन सीमा जैसे कठिन इलाके में देखा जा सकता है। फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि मानवरूपी रोबोट अभी प्रयोग और सीमित उपयोग के चरण में हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक वास्तविक युद्ध में उन्हें भरोसेमंद बनाने के लिए मजबूत संचार, ऊर्जा व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, स्वायत्त निर्णय और कठिन मौसम तथा भूभाग में संचालन जैसी कई समस्याओं का समाधान जरूरी होगा। इसलिए तत्काल बड़े पैमाने पर मानव सैनिकों की जगह रोबोटों के आने की संभावना कम है।
फिर भी चीन की मौजूदा दिशा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सैन्य AI, ड्रोन और रोबोटिक्स को साथ जोड़ने की कोशिश भविष्य के युद्ध का तरीका बदल सकती है। सबसे पहले ऐसी मशीनें निगरानी, रसद, रखरखाव और बेहद खतरनाक इलाकों में सैनिकों का जोखिम कम करने के लिए इस्तेमाल हो सकती हैं। तकनीक परिपक्व होने के साथ उनकी भूमिका बढ़ सकती है। फिलहाल असली बदलाव रोबोट सैनिकों की संख्या नहीं बल्कि इंसान और मशीन के बीच बनने वाली नई सैन्य साझेदारी में दिखाई दे रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक सैन्य प्रकाशनों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। चीन द्वारा रोबोटों के सैन्य इस्तेमाल की दिशा में तैयारी के संकेत जरूर मिलते हैं लेकिन मानवरूपी रोबोटों की बड़े पैमाने पर अग्रिम मोर्चे पर तैनाती अभी स्थापित तथ्य नहीं है और भविष्य की सैन्य भूमिका तकनीकी विकास पर निर्भर करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।