अज्ञात शवों का दफन शुरू नेपाल त्रासदी की असली तस्वीर आई सामने। करीब 750 मौतों और 3,000 से ज्यादा लापता होने के बीच परिवार अब भी अपनों को खोज रहे हैं।
96 अज्ञात शव दफन, पहचान के लिए नंबर
चितवन, नेपाल। अज्ञात शवों का दफन अब नेपाल की उस त्रासदी का सबसे दर्दनाक चेहरा बन गया है जिसने हिमालयी इलाकों में भारी तबाही मचाई। बुधवार की ग्लेशियर तबाही के बाद नदियों और मलबे से बड़ी संख्या में शव बरामद हुए हैं जिनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, चितवन के देवघाट जंगल में शनिवार को 96 अज्ञात शव दफन किए गए और रविवार को 100 से ज्यादा और शव दफन करने की तैयारी थी। प्रशासन के सामने स्वास्थ्य और पहचान दोनों की चुनौती है। [1]
चितवन का देवघाट जंगल कभी सुबह की सैर के लिए जाना जाता था लेकिन अब वहां सैकड़ों अस्थायी कब्रें बनाई गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ के पानी में कई दिन पड़े रहने के कारण शव तेजी से खराब हो रहे थे। इसी वजह से उन्हें खुले में रखने के बजाय अस्थायी रूप से अज्ञात शवों का दफन करने का फैसला लिया गया। हर शव की तस्वीर और रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। कब्र की जगह को भी दर्ज किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी परिवार को पहचान मिलने पर शव को खोजकर निकाला जा सके।
प्रशासन ने हर दफन स्थल पर पहचान का निशान जमीन के ऊपर और नीचे रखने की व्यवस्था की है। साथ ही शवों से DNA नमूने लिए जा रहे हैं। इसका मकसद यह है कि अगर किसी परिवार की शिकायत, सरकारी रिकॉर्ड या आनुवंशिक जांच से पहचान सामने आती है तो संबंधित अवशेष तक पहुंचा जा सके। भारत ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भेजी है जो नेपाली अधिकारियों के साथ DNA जांच में मदद करेगी। नेपाल चीन की एक टीम के साथ भी समन्वय कर रहा है।
भारतपुर अस्पताल में हालात और ज्यादा गंभीर हैं। अस्पताल की अस्थायी मोर्चरी की क्षमता करीब 50 शवों की है लेकिन वहां लगभग 125 शव रखे गए थे। कई शव कई दिनों तक बाढ़ के पानी में रहने के कारण पहचान से बाहर हो चुके हैं। करीब 100 पुलिसकर्मी, बचावकर्मी और दूसरे अधिकारी शवों की तस्वीर लेने, दस्तावेज तैयार करने और परिवारों की पहचान में मदद कर रहे हैं। शवों को ठंडा रखने के लिए सूखी बर्फ, एयर कंडीशनर और औद्योगिक कूलिंग यूनिट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
चितवन एक्सपो सेंटर के बाहर भी सैकड़ों लोगों की बेचैनी साफ दिख रही है। 200 से ज्यादा लोग अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश में वहां पहुंचे थे। कई परिवार दूर के जिलों से बैग लेकर आए हैं और recovered शवों की तस्वीरों से पहचान की उम्मीद कर रहे हैं। आसपास एक पुराने मकान को भी शव रखने के अस्थायी केंद्र में बदल दिया गया है। अंदर बॉडी बैग रखे हैं और बाहर नेपाल रेड क्रॉस तथा पुलिस की मदद डेस्क लगी है। लेकिन लगातार बढ़ते शवों की संख्या के बीच अज्ञात शवों का दफन करने का निर्णय लिया गया है।
बाढ़ में करीब 750 लोगों की मौत और 3,000 से ज्यादा लोगों के लापता होने की रिपोर्ट है। नदी और मलबे में बहकर शव चितवन तक पहुंचने के बाद प्रशासन के सामने सिर्फ उन्हें बरामद करने की चुनौती नहीं है बल्कि हर परिवार को उसके सवाल का जवाब देने की जिम्मेदारी भी है। कई शवों के चेहरे पहचान में नहीं आ रहे हैं इसलिए DNA जांच अब बेहद अहम हो गई है। यही प्रक्रिया भविष्य में अज्ञात शवों की पहचान का सबसे भरोसेमंद रास्ता बन सकती है।
बचाव अभियान जारी रहने के साथ शवों की संख्या भी बढ़ रही है। एक वाहन में 13 शव पहुंचने के बाद सुबह तक 6 एंबुलेंस केंद्र के बाहर खड़ी थीं। लगातार आ रहे शव इस आपदा की भयावहता बता रहे हैं। जिन कर्मचारियों को रोज यह काम करना पड़ रहा है उन पर भी इसका मानसिक और शारीरिक असर दिख रहा है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता शवों का सम्मानजनक प्रबंधन, वैज्ञानिक तरीके से पहचान और परिवारों को सही जानकारी देना है। अज्ञात शवों का दफन इसी कठिन प्रक्रिया का फिलहाल अस्थायी हिस्सा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े राहत और बचाव अभियान के दौरान बदल सकते हैं तथा अस्थायी दफन के बाद पहचान होने पर अवशेषों को परिवारों को सौंपने की प्रक्रिया संबंधित अधिकारियों के निर्णय और कानूनी औपचारिकताओं पर निर्भर करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।