राजस्थान

नन्द महोत्सव में कृष्ण भक्ति का रंग, भजनों पर जमकर झूमे श्रद्धालु

अग्रसेन भवन में नन्द महोत्सव के दौरान रासलीला, छप्पन भोग और फूलों की होली ने श्रद्धालुओं को भक्ति में झुमाया, भजनों पर गूंजा उत्साह।

By अजय त्यागी 1 min read
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नन्द महोत्सव का नजारा

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। अग्रसेन भवन में नन्द महोत्सव का नजारा ऐसा रहा कि धार्मिक उल्लास के साथ सांस्कृतिक रंग भी खूब दिखाई दिया। भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला, छप्पन भोग और फूलों की होली ने श्रद्धालुओं को बांधे रखा। अंतरराष्ट्रीय गायिका सुमन सोनी के भजनों पर महिला और पुरुष श्रद्धालु झूमते नजर आए। आयोजन अग्रवाल समाज सम्पति ट्रस्ट के सानिध्य में मध्य जोन अग्रवाल महिला मंडल की ओर से किया गया। कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी रही।

रासलीला ने बांधा समां

नन्द महोत्सव में कृष्ण की लीलाओं को मंच पर जीवंत किया गया। रासलीला में कृष्ण का स्वरूप रानु तोदी और ऋतु निमोदिया ने निभाया, जबकि राधा के स्वरूप में प्रीति टिक्कीवाल और सीमा अग्रवाल नजर आईं। बच्चों और बड़ों के लिए राधा कृष्ण प्रसंगों पर आधारित नृत्य और खेलकूद प्रतियोगिताएं भी हुईं। डिवाइन ग्रुप के बच्चों के साथ पलक और रिद्धी टिक्कीवाल ने नन्हे राधा कृष्ण के रूप में आकर्षण बढ़ाया। आयोजन में भक्ति के साथ परिवारों की भागीदारी भी खास रही।

फूलों की होली के दौरान श्रद्धालुओं ने एक दूसरे पर फूल बरसाए और पूरा माहौल कृष्ण भक्ति से सराबोर नजर आया। भजनों की प्रस्तुति ने उत्साह और बढ़ा दिया। समारोह में अग्रवाल समाज सम्पति ट्रस्ट की ओर से मध्य जोन अग्रवाल महिला मंडल सहित अन्य महिला मंडलों और सदस्याओं का स्वागत व सम्मान किया गया। ट्रस्ट के सचिव मुकेश अग्रवाल सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। संगीता अग्रवाल ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम में रासलीला, छप्पन भोग और फूलों की होली हर्षोल्लास के साथ कराई गई। अंत तक नन्द महोत्सव का उल्लास बना रहा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक आयोजन से जुड़े विवरण आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं और इनमें व्यक्त भावनाएं प्रतिभागियों तथा आयोजकों की हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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