भारी बारिश ने गुवाहाटी की रफ्तार रोक दी, कई इलाकों में पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। गुवाहाटी में जलभराव ने फिर पुराने सवाल खड़े कर दिए हैं।
गुवाहाटी में जलभराव
गुवाहाटी, असम। भारी बारिश के बाद गुवाहाटी में जलभराव से कई इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सोमवार रात से लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया और सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। बरौवारी में बारिश के दौरान पेड़ गिरने से एक कार और स्कूटर क्षतिग्रस्त हो गए। गिरे पेड़ ने सड़क पर यातायात भी रोक दिया। दूसरी ओर गुवाहाटी क्लब इलाके में पानी इतना भर गया कि वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। [1]
गुवाहाटी में जलभराव शहर के लिए कोई नया संकट नहीं है। तेज बारिश होते ही कई निचले इलाकों में पानी जमा होने लगता है और फिर सड़क, नाली और यातायात व्यवस्था पर सवाल उठने लगते हैं। गुवाहाटी क्लब इलाके में भी पानी जमा होने से वाहनों को निकलने में मुश्किल हुई। पैदल लोगों को भी पानी के बीच रास्ता बनाना पड़ा। मौसम अपना काम कर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि शहर की जल निकासी व्यवस्था हर बार इतनी बारिश के सामने बेबस क्यों नजर आती है।
सरकारी रिकॉर्ड भी मानता है कि गुवाहाटी में बार बार होने वाला जलभराव गंभीर शहरी समस्या है। नगर निकाय के अनुसार तेजी से बढ़ते निर्माण, प्राकृतिक जल निकासी क्षेत्रों में कमी, नालियों में गाद और कचरे का जमाव तथा जल निकायों पर दबाव इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। यानी बारिश को दोष देना सबसे आसान जवाब है, लेकिन पूरी कहानी सिर्फ बादलों की नहीं है। जब प्राकृतिक रास्ते और ड्रेनेज सिस्टम पानी को संभाल नहीं पाते तो शहर की सड़कें ही पानी के लिए सबसे आसान रास्ता बन जाती हैं।
बरौवारी में पेड़ गिरने से अलग तरह की परेशानी सामने आई। कार और स्कूटर को नुकसान पहुंचा और सड़क पर पेड़ गिरने से यातायात भी प्रभावित हुआ। ऐसी स्थिति में बारिश सिर्फ जलभराव नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा का सवाल भी बन जाती है। गुवाहाटी में जलभराव के बीच अगर पेड़ गिरने जैसी घटनाएं भी सामने आएं तो प्रशासन के लिए चुनौती और बढ़ जाती है। शहर में बारिश के दौरान संवेदनशील इलाकों की निगरानी, जल निकासी और रास्तों से बाधाएं हटाने की व्यवस्था कितनी तेज है, इसका जवाब जमीन पर दिखना चाहिए।
गुवाहाटी में कृत्रिम बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए प्रशासन ने कई योजनाएं और अभियान चलाए हैं। नालियों की सफाई, गाद निकालने, पंप लगाने और जल निकासी नेटवर्क सुधारने जैसे उपायों का जिक्र सरकारी योजनाओं में भी है। फिर भी हर तेज बारिश के बाद वही दृश्य लौट आता है। गुवाहाटी में जलभराव की समस्या इसलिए सिर्फ आज की बारिश की खबर नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही शहरी योजना और जल निकासी की चुनौती है। जनता को अब घोषणाओं से ज्यादा बारिश के बाद सूखी सड़कें चाहिए।
इस बार भी लोगों की परेशानी सिर्फ पानी में फंसे वाहनों तक सीमित नहीं रही। जलभराव ने रोजमर्रा की आवाजाही को प्रभावित किया और पैदल चलने वालों के लिए भी मुश्किल पैदा की। शहर के लिए चुनौती यह है कि भारी बारिश को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसके पानी को कितनी तेजी से निकाला जाए, यह प्रशासनिक तैयारी से तय हो सकता है। गुवाहाटी में जलभराव हर बार यह याद दिलाता है कि बारिश से लड़ने के बजाय शहर को बारिश का पानी संभालने लायक बनाना ज्यादा जरूरी है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। भारी बारिश के दौरान जलभराव और यातायात की स्थिति तेजी से बदल सकती है तथा स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति अलग हो सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।