उत्तर प्रदेश

राम मंदिर के CEO के लिए 3 नाम ट्रस्ट के पास पहुंचे, कल होगा फैसला

राम मंदिर के CEO के लिए सर्च कमेटी ने 3 नामों की अंतिम सिफारिश ट्रस्ट को सौंप दी। अब बुधवार की बैठक में नियुक्ति पर फैसला होगा।

By अजय त्यागी 1 min read
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सर्च कमेटी की अंतिम रिपोर्ट

अयोध्या, उत्तर प्रदेश। राम मंदिर के CEO की नियुक्ति को लेकर अब फैसला ट्रस्ट के हाथ में पहुंच गया है। 3 सदस्यीय सर्च कमेटी ने मंगलवार को अपनी अंतिम रिपोर्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। कमेटी ने पद के लिए 3 नामों की सिफारिश की है लेकिन इन नामों का खुलासा अभी नहीं किया गया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने कहा है कि बुधवार को होने वाली बैठक में सिफारिशों पर विचार किया जाएगा। अंतिम फैसला ट्रस्ट करेगा और नाम की घोषणा भी बैठक के निर्णय पर निर्भर करेगी।

रिपोर्ट पहुंची ट्रस्ट तक

सर्च कमेटी में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी, पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावरे और रिटायर्ड न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली शामिल हैं। कमेटी ने कई चरणों की चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद राम मंदिर के CEO के लिए 3 सबसे उपयुक्त उम्मीदवारों के नाम ट्रस्ट को सौंपे हैं। न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली के मुताबिक उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनकी सोच, मुद्दों की समझ और भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति समेत कई मानकों पर किया गया। कमेटी ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को अहम आधार बताया है। अब सिफारिश पर अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी ट्रस्ट की है। 

राम मंदिर के CEO पद के लिए 11 जुलाई से 18 जुलाई के बीच 5585 आवेदन मिले थे। इनमें से उम्मीदवारों की छंटनी के लिए 600 अंकों का Google Form तैयार किया गया और 3570 उम्मीदवारों ने जवाब दिया। 60 प्रतिशत से ज्यादा अंक पाने वालों को आगे की प्रक्रिया के लिए चुना गया। इसके बाद 108 उम्मीदवार ऐसे मिले जिन्होंने 600 में से कम से कम 470 अंक हासिल किए थे। इन उम्मीदवारों से 4 दिनों तक ऑनलाइन बातचीत हुई। आगे 17 उम्मीदवारों को अयोध्या धाम में आमने सामने बातचीत के लिए बुलाया गया और 16 उम्मीदवार इस चरण में पहुंचे। 

कल ट्रस्ट की बैठक

अब बुधवार की बैठक सबसे अहम मानी जा रही है क्योंकि इसी बैठक में सर्च कमेटी की सिफारिशों पर ट्रस्ट विचार करेगा। स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने कमेटी के सदस्यों के प्रयासों के लिए आभार जताते हुए कहा कि अंतिम फैसला ट्रस्ट के अधिकार में है। उनसे जब पूछा गया कि क्या बैठक के बाद नाम की घोषणा हो सकती है तो उन्होंने उम्मीद जताई लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि फैसला ट्रस्ट बोर्ड ही करेगा। यानी फिलहाल 3 नाम ट्रस्ट के पास हैं और उनमें से किसी एक को चुनने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। 

राम मंदिर के CEO की नियुक्ति को मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रस्ट ने इस पद के लिए देशभर से आए हजारों आवेदनों में से उम्मीदवारों को कई स्तरों पर परखा है। रिपोर्ट के मुताबिक चयन प्रक्रिया में पेशेवर योग्यता के साथ उम्मीदवारों की दृष्टि और मंदिर से जुड़े धार्मिक तथा सांस्कृतिक संदर्भों को समझने की क्षमता पर भी ध्यान दिया गया। अब कमेटी का काम पूरा हो चुका है और उसके सामने आए 3 नामों में से अंतिम व्यक्ति चुनने की जिम्मेदारी ट्रस्ट की है। 

नामों पर बना सस्पेंस

अभी तक ट्रस्ट या सर्च कमेटी ने उन 3 उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। यही वजह है कि बुधवार की बैठक के फैसले को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। कुछ रिपोर्टों में रिटायर्ड नौकरशाहों के नाम संभावित दावेदारों के तौर पर सामने आए हैं लेकिन आधिकारिक तौर पर सिफारिश किए गए 3 नामों की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए अंतिम घोषणा से पहले किसी भी नाम को तय उम्मीदवार मानना उचित नहीं होगा। ट्रस्ट की बैठक के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। 

फिलहाल इतना तय है कि 5585 आवेदनों से शुरू हुई प्रक्रिया अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सर्च कमेटी ने अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है और 3 नामों की सिफारिश कर दी है। अब बुधवार को होने वाली ट्रस्ट बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाना है। अगर ट्रस्ट सिफारिशों में से किसी एक नाम पर सहमति बना लेता है तो राम मंदिर के CEO को लेकर लंबे समय से चल रही चयन प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। इसके साथ मंदिर के प्रशासनिक प्रबंधन में पहली बार इस पद पर स्थायी नियुक्ति का रास्ता साफ हो सकता है। 

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सर्च कमेटी द्वारा सुझाए गए 3 नामों का आधिकारिक रूप से खुलासा नहीं किया गया है और अंतिम नियुक्ति का निर्णय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा किया जाना है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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