निकाय चुनाव में 270 वार्डों पर 1213 उम्मीदवार मैदान में। जांच में कई पर्चे खारिज होने से कई मुकाबले बदले। वार्ड 69 में लीला गहलोत का निर्विरोध निर्वाचन तय।
प्रतीकात्मक फोटो
बीकानेर, राजस्थान। निकाय चुनाव को लेकर बीकानेर जिले में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जिले के 1 नगर निगम और 6 नगर पालिकाओं के 270 वार्डों में नामांकन पत्रों की संवीक्षा के बाद फिलहाल 1213 उम्मीदवार मैदान में हैं। हालांकि नाम वापसी के बाद यह संख्या बदल सकती है। नामांकन जांच के दौरान कई वार्डों में समीकरण अचानक बदल गए। वार्ड 69 में ममता सांसी का पर्चा खारिज होने के बाद भाजपा की लीला गहलोत के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया है। अब अंतिम तस्वीर नाम वापसी के बाद सामने आएगी। [1]
निकाय चुनाव में वार्ड 69 का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में है। नामांकन जांच के दौरान ममता सांसी का पर्चा खारिज होने के बाद भाजपा प्रत्याशी लीला गहलोत के सामने कोई वैध प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार ममता सांसी आरएलपी प्रत्याशी के तौर पर मैदान में थीं और नामांकन में पार्टी संबंधी औपचारिकता को लेकर आपत्ति सामने आई। इसके बाद उनका पर्चा निरस्त कर दिया गया। नतीजा यह रहा कि मतदान से पहले ही वार्ड में मुकाबला खत्म हो गया और लीला गहलोत का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जाने लगा।
नामांकन जांच में वार्ड 26 से कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप कुमार और वार्ड 30 से भाजपा प्रत्याशी भंवरलाल का पर्चा भी खारिज होने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी में दोनों के खिलाफ अलग अलग पुलिस थानों में मामले दर्ज होने की बात कही गई है। हालांकि किसी प्रत्याशी के खिलाफ दर्ज मामले की पूरी कानूनी स्थिति और नामांकन निरस्तीकरण का आधिकारिक आधार निर्वाचन अधिकारी के आदेश से ही स्पष्ट माना जाना चाहिए। इतना जरूर है कि इन नामांकनों के खारिज होने से दोनों वार्डों में राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति प्रभावित हुई है।
बीकानेर नगर निगम के निकाय चुनाव में वार्ड 2 में फिलहाल सबसे ज्यादा 15 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। यहां कांग्रेस के संजय आचार्य और भाजपा के दीपक व्यास के सामने 13 अन्य प्रत्याशी भी चुनौती दे रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवार होने से वोटों का बंटवारा अहम हो सकता है। वार्ड 8 में भी 14 उम्मीदवार मैदान में होने की जानकारी है। इन दोनों वार्डों में मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प रहेगा क्योंकि प्रमुख दलों के साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी मतदाताओं के सामने विकल्प बनकर खड़े हैं और अंतिम नतीजे पर उनका असर पड़ सकता है।
नामांकन जांच के बाद जिले में 5 वार्डों में आमने सामने के मुकाबले की स्थिति बनने की जानकारी सामने आई है। इनमें 4 वार्डों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है जबकि 1 वार्ड में कांग्रेस के सामने निर्दलीय प्रत्याशी मुकाबले में है। वार्ड 26 में कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा खारिज होने के बाद मुकाबले का स्वरूप बदल गया है। अब रामदयाल पंचारिया और 4 निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबले की स्थिति बताई गई है। नाम वापसी के बाद इन समीकरणों में फिर बदलाव संभव है।
निकाय चुनाव में बीकानेर नगर निगम के अलावा नोखा, श्रीडूंगरगढ़, लूणकरणसर, देशनोक, नापासर और खाजूवाला की नगर पालिकाएं चुनाव प्रक्रिया में शामिल हैं। इन सभी निकायों को मिलाकर 270 वार्ड हैं। अकेले बीकानेर नगर निगम में 80 वार्ड हैं। नोखा में 45, श्रीडूंगरगढ़ में 40, लूणकरणसर में 35, देशनोक और नापासर में 25 25 तथा खाजूवाला में 20 वार्ड हैं। आरक्षण की प्रक्रिया में 39 वार्ड अनुसूचित जाति, 54 वार्ड अन्य पिछड़ा वर्ग और 177 वार्ड सामान्य वर्ग के लिए रखे गए हैं।
जिले में 76 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं और महापौर पद सामान्य वर्ग के लिए खुला रखा गया है। अब नामांकन की संवीक्षा के बाद उम्मीदवारों की तस्वीर पहले से ज्यादा साफ हुई है। वार्ड 69 में निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बनी है जबकि वार्ड 2 और वार्ड 8 जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में उम्मीदवार मैदान में हैं। यही विरोधाभास पूरे चुनाव को रोचक बना रहा है। एक तरफ कहीं मुकाबला खत्म होता दिख रहा है तो दूसरी तरफ कई वार्डों में वोटों के बंटवारे का खतरा बढ़ गया है।
अब सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की नजर नाम वापसी की अंतिम प्रक्रिया पर टिकी है। इसके बाद ही 270 वार्डों में वास्तविक मुकाबलों की अंतिम तस्वीर साफ होगी। फिलहाल 1213 उम्मीदवारों का आंकड़ा सामने है लेकिन नाम वापस लेने वाले प्रत्याशियों के कारण यह संख्या घट सकती है। चुनाव चिन्हों का आवंटन 4 सितंबर को होना है। इसके बाद मतदाताओं के सामने हर वार्ड में मुकाबले की स्पष्ट तस्वीर होगी। इसलिए अभी सामने आया चुनावी गणित अंतिम नहीं माना जा सकता और अगले चरण में कई नए समीकरण उभर सकते हैं।
निकाय चुनाव में नामांकन जांच ने साफ कर दिया है कि अंतिम मुकाबला केवल टिकट और दलों की ताकत से तय नहीं होगा। किसी वार्ड में पर्चा खारिज होना पूरे समीकरण को बदल सकता है और कहीं ज्यादा उम्मीदवार होने से वोटों का बंटवारा निर्णायक बन सकता है। वार्ड 69 में लीला गहलोत का निर्विरोध निर्वाचन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अब नाम वापसी के बाद 270 वार्डों में कौन आमने सामने रहेगा और कहां मुकाबला बहुकोणीय बनेगा, इस पर सबकी नजर है। यही तस्वीर आगे की चुनावी रणनीति तय करेगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नामांकन, प्रत्याशियों की संख्या और निर्विरोध निर्वाचन से जुड़ी स्थिति नाम वापसी तथा निर्वाचन प्रक्रिया के अगले चरणों के बाद बदल सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।