हरियाणा में 504 करोड़ रुपये की सरकारी धन की हेराफेरी के मामले में CBI ने 19 आरोपियों के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 6 IAS अधिकारी भी हैं।
प्रतीकात्मक फोटो
पंचकूला, हरियाणा। हरियाणा सरकार के 504 करोड़ रुपये की कथित सरकारी धन की हेराफेरी के मामले में CBI ने 19 आरोपियों के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। इनमें हरियाणा कैडर के 6 IAS अधिकारी, IDFC First Bank के 3 अधिकारी, AU Small Finance Bank का 1 अधिकारी और राज्य सरकार के 9 अन्य अधिकारी शामिल हैं। CBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, मामले में सरकारी रकम को कथित तौर पर तय बैंक शाखाओं में पहुंचाकर बाद में दूसरी संस्थाओं और खातों के जरिए निकालने की साजिश की गई। [1]
जांच एजेंसी के मुताबिक 8 सरकारी विभागों और संस्थाओं का पैसा अलग अलग अधिकृत बैंकों से निकालकर IDFC First Bank और AU Small Finance Bank की कुछ शाखाओं में पहुंचाया गया। आरोप है कि इसके बाद रकम को तीसरे पक्ष के खातों में भेजा गया और कई बैंक खातों से घुमाकर नकदी में बदला गया। CBI का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी वित्तीय नियमों का उल्लंघन हुआ। प्रभावित संस्थाओं में पंचायत विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और बिजली उत्पादन निगम शामिल हैं।
मामले में CBI ने जिन आरोपियों के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दाखिल की है उन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, सबूत नष्ट करने, फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने और खातों में हेरफेर जैसे आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत रिश्वत और आपराधिक कदाचार से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। सरकारी धन की हेराफेरी की जांच में एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर रकम किसके इशारे पर स्थानांतरित हुई और अंतिम लाभ किसे मिला।
यह इस मामले में CBI की तीसरी चार्जशीट है। इससे पहले 18 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और अब कुल 37 लोग चार्जशीट में शामिल हो चुके हैं। जांच के दौरान CBI ने 54 जगहों पर तलाशी ली और करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य का सोना समेत कई अहम सबूत जब्त किए। अब तक 26 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। मामला पहले हरियाणा के राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास था जिसे राज्य सरकार के अनुरोध पर CBI को सौंपा गया।
जांच एजेंसी का कहना है कि सरकारी धन की हेराफेरी से जुड़े इस मामले में अभी जांच पूरी नहीं हुई है और अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। CBI कथित तौर पर रकम की पूरी मनी ट्रेल का पता लगाने के साथ यह भी जांच रही है कि अपराध से हासिल धन कहां लगाया गया। चंडीगढ़ से जुड़े 2 संबंधित मामलों को भी CBI ने अपने हाथ में लिया है जिनमें चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम चंडीगढ़ तथा CREST से जुड़े मामले शामिल हैं। सरकारी धन की हेराफेरी में जिम्मेदार लोगों और कथित रकम के अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचना अब जांच का बड़ा लक्ष्य है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। आरोपपत्र में लगाए गए आरोप जांच का हिस्सा हैं और अदालत के अंतिम निर्णय तक किसी आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।