राजस्थान

नेत्रदान जागरूकता से दूर होंगी भ्रांतियां, युवाओं से आगे आने की अपील

नेत्रदान जागरूकता के तहत कॉलेजों में सेमिनार हुए, विद्यार्थियों को प्रक्रिया और चिकित्सकीय पहलुओं की जानकारी देकर भ्रांतियां दूर की गईं।

By अजय त्यागी 1 min read
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नेत्रदान जागरूकता अभियान

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। नेत्रदान जागरूकता को लेकर राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के तहत आई बैंक सोसाइटी ऑफ राजस्थान भीलवाड़ा चैप्टर ने कंचन देवी महाविद्यालय और ग्रीन वैली महाविद्यालय में जागरूकता सेमिनार आयोजित किए। विद्यार्थियों को नेत्रदान की जरूरत, प्रक्रिया और चिकित्सकीय पहलुओं की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि मरणोपरांत नेत्रदान से दो दृष्टिहीन लोगों को दृष्टि मिलने की संभावना बनती है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को प्रेरित करना और अंधत्व निवारण के प्रयासों में उनकी भागीदारी बढ़ाना रहा।

भ्रांतियों पर खुली बात

कार्यक्रम का संचालन और मार्गदर्शन नवीन भदादा ने किया। मीडिया प्रभारी मनीष बंब ने बताया कि दोनों महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को नेत्रदान से समाज को होने वाले लाभ समझाए गए। मुख्य अतिथि प्रांतपाल लायन डॉ. निशांत ने युवाओं से खुद नेत्रदान के लिए आगे आने और दूसरों को प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों से सवाल जवाब भी किए और नेत्रदान को लेकर मन में मौजूद भ्रांतियों तथा शंकाओं का समाधान किया। इस दौरान वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर विद्यार्थियों को विषय समझाने पर जोर रहा।

आई बैंक सोसाइटी ऑफ राजस्थान भीलवाड़ा चैप्टर के अध्यक्ष राकेश पगारिया ने कहा कि समाज में नेत्रदान को लेकर कई भ्रांतियां और गलत धारणाएं आज भी मौजूद हैं। इन्हें दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मरणोपरांत नेत्रदान की प्रक्रिया सरल और सम्मानजनक होती है तथा इससे किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाने में मदद मिल सकती है। सरकारी जानकारी के अनुसार कॉर्निया मृत्यु के बाद निर्धारित समय के भीतर निकाला जा सकता है और इसके लिए संबंधित आई बैंक से जल्द संपर्क करना जरूरी होता है।

चिकित्सकीय पहलू समझाए

विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रतिष्ठा छीपा ने नेत्रदान के चिकित्सकीय और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद जल्द से जल्द प्रक्रिया शुरू करना महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय स्तर की सरकारी जानकारी के अनुसार कॉर्निया सामान्य तौर पर मृत्यु के कुछ घंटों के भीतर प्राप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी समझाया कि नेत्रदान में कॉर्निया से जुड़ी प्रक्रिया होती है और इससे मृतक के चेहरे की बनावट पर विकृति नहीं आती। विद्यार्थियों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और समाज में सही जानकारी पहुंचाने की अपील की गई।

सुनील जागेटिया और नवीन भदादा ने विद्यार्थियों तथा अध्यापकों से अधिकाधिक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में नेत्र सहायक तकनीकी अधिकारी चेतन भट्ट और आर पी बल्दवा सहित अन्य कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा। राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा हर वर्ष 25 अगस्त से 8 सितंबर तक जागरूकता के लिए आयोजित किया जाता है और इसका उद्देश्य नेत्रदान को लेकर मिथकों तथा आशंकाओं को दूर करना भी है। भीलवाड़ा में नेत्रदान जागरूकता के इन कार्यक्रमों ने युवाओं को जनसेवा के इस विषय से जोड़ने का संदेश दिया।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नेत्रदान से संबंधित चिकित्सकीय प्रक्रिया, पात्रता और समय सीमा के लिए संबंधित आई बैंक तथा अधिकृत चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह और निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन आवश्यक है। इस रिपोर्ट में स्थानीय कार्यक्रम से संबंधित विवरण उपलब्ध कराए गए समाचार तथ्यों पर आधारित हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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