प्रादेशिक

16 झीलें खतरे में, बर्फीले पहाड़ों में छिपा पानी बन सकता है बड़ी आफत

सिक्किम में 40 ग्लेशियल झीलें हाई हेजार्ड मिली हैं और इनमें 16 झीलें खतरे में हैं। शाको छो सबसे संवेदनशील है। निगरानी तेज है पर खतरा भी बड़ा है।

By अजय त्यागी 1 min read
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ग्लेशियल झील

गंगटोक, सिक्किम। 16 झीलें खतरे में हैं और यह कोई पहाड़ी अफवाह नहीं बल्कि सरकारी और वैज्ञानिक आकलन है। सिक्किम में 40 ग्लेशियल झीलों को हाई हेजार्ड माना गया है और 16 सबसे अधिक जोखिम वाली श्रेणी में हैं। शाको छो को सबसे संवेदनशील बताया गया है। वहां करीब 27 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा है। अब सवाल यह है कि पहाड़ों पर जमा पानी कब और कितना खतरनाक हो सकता है। प्रकृति ने चेतावनी दे दी है और इंसान फिलहाल सेंसर लगाकर उम्मीद कर रहा है कि खतरा भी तकनीक का सम्मान करेगा।  [1]

खतरे की ऊंचाई देखिए

शाको छो करीब 17000 फीट की ऊंचाई पर है और उसका प्राकृतिक निकास नहीं है। झील का पानी कमजोर टर्मिनल मोरेन से होकर रिसता है। यही वजह है कि इसकी स्थिति को गंभीरता से देखा जा रहा है। सरकार ने सीधे बांध काटने के बजाय सौर ऊर्जा से पंप लगाकर पानी का स्तर घटाने का प्रस्ताव रखा है। लक्ष्य करीब 20 मीटर तक जलस्तर कम करना है। सुनने में योजना आधुनिक लगती है लेकिन जमीन पर काम करना आसान नहीं क्योंकि वहां बिजली नहीं और सर्दियों में पानी जम जाता है।

ग्लेशियल झील आउटबर्स्ट फ्लड यानी जीएलओएफ तब हो सकता है जब झील को रोकने वाली प्राकृतिक मोरेन संरचना टूटे या अचानक पानी बाहर निकले। भूस्खलन हिमस्खलन भारी बारिश या दूसरी प्राकृतिक घटनाएं इसका कारण बन सकती हैं। सिक्किम में 2023 का साउथ ल्होनाक जीएलओएफ इसका बड़ा उदाहरण है। उस घटना ने साफ कर दिया था कि ऊपर पहाड़ पर शुरू हुई आफत नीचे पहुंचते पहुंचते कितनी बड़ी तबाही बन सकती है। इसलिए 16 झीलें खतरे में होना सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि तैयारी तेज करने का संकेत है।

सेंसर बनाम संकट

सिक्किम अब झीलों की निगरानी के लिए सेंसर सैटेलाइट इमेजिंग स्वचालित मौसम केंद्र और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों पर जोर दे रहा है। ल्होनाक और गुरुडोंगमार क्षेत्र के लिए भी अलग उपायों पर विचार हो रहा है। शाको छो के अलावा ल्होनाक और गुरुडोंगमार झील समूहों को भी गंभीर खतरे वाले क्षेत्र माना गया है। मतलब पहाड़ों में एक नहीं कई मोर्चे हैं और हर मोर्चे के लिए अलग तैयारी चाहिए। अच्छी बात यह है कि खतरे की पहचान हो चुकी है। अब बस तैयारी इतनी तेज हो कि पानी उससे पहले न दौड़ पड़े।

16 झीलें खतरे में होने का मतलब यह नहीं कि सभी झीलें तुरंत फटने वाली हैं। जोखिम आकलन संभावित खतरे को बताता है निश्चित आपदा को नहीं। लेकिन 40 हाई हेजार्ड झीलों में 16 का सबसे ऊंचे जोखिम वाली श्रेणी में होना पर्याप्त गंभीर चेतावनी है। वैज्ञानिकों ने 16 में से 13 झीलों का अध्ययन भी किया है। अब जरूरत अध्ययन को जमीन पर सुरक्षा में बदलने की है। क्योंकि 16 झीलें खतरे में वाली चेतावनी को केवल रिपोर्ट बनाकर छोड़ दिया गया तो अगली बार प्रकृति प्रेस कॉन्फ्रेंस करके नहीं बताएगी कि पानी निकलने वाला है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ग्लेशियल झीलों की जोखिम श्रेणियां वैज्ञानिक और प्रशासनिक आकलनों पर आधारित हैं और इन्हें किसी झील के तत्काल फटने की निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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