छात्रा से मारपीट का मामला, दो नकाबपोश कॉलेज में घुसे और तस्वीरों के विवाद के बाद छात्रा का पीछा कर मारपीट की। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।
प्रतीकात्मक फोटो
संगारेड्डी, तेलंगाना। कॉलेज में पढ़ाई का माहौल था, लेकिन कहानी अचानक ऐसी दिशा में चली गई जहां किताबों की जगह दबंगई नजर आने लगी। रिपोर्ट के मुताबिक 19 वर्षीय छात्रा कॉलेज में मौजूद थी तभी 2 नकाबपोश युवक परिसर में दाखिल हुए और दूसरी मंजिल पर छात्रा से मारपीट शुरू कर दी। छात्रा बचने के लिए तीसरी मंजिल की ओर गई तो दोनों युवक पीछा करते हुए वहां तक भी पहुंच गए। तस्वीरों को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिर इस स्तर तक कैसे पहुंचा, यह जांच का विषय है। [1]
बताया गया है कि घटना सरकारी तारा डिग्री कॉलेज में हुई। छात्रा दूसरे वर्ष की पढ़ाई कर रही है और घटना के समय कॉलेज परिसर में थी। तस्वीरें साझा करने को लेकर विवाद के बाद दोनों युवक कथित तौर पर वहां पहुंचे और छात्रा को निशाना बनाया। छात्रा से मारपीट का यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि घटना किसी सुनसान जगह पर नहीं बल्कि शिक्षण संस्थान के भीतर होने की बात सामने आई है। यानी जहां अनुशासन की घंटी बजनी चाहिए थी, वहां विवाद ने हिंसा का रास्ता पकड़ लिया।
घटना के मुताबिक दोनों युवकों ने चेहरे ढक रखे थे और करीब 3 बजे कॉलेज में दाखिल हुए। दूसरी मंजिल पर छात्रा से कथित मारपीट के बाद वह वहां से निकलकर तीसरी मंजिल की ओर गई, लेकिन युवक पीछे पहुंच गए। छात्रा से मारपीट के घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाहरी लोग परिसर में दाखिल होकर इतना आगे कैसे पहुंच गए। अगर निगरानी व्यवस्था मौजूद थी तो उसकी नजर से यह सब कैसे गुजर गया, इसका जवाब जांच के साथ कॉलेज प्रशासन को भी देना होगा।
इस घटना ने कॉलेज परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो युवक चेहरा ढककर अंदर आए और छात्रा का पीछा करते हुए एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक पहुंच गए। ऐसे में सवाल केवल आरोपियों की पहचान का नहीं बल्कि प्रवेश व्यवस्था, निगरानी और तत्काल मदद की व्यवस्था का भी है। छात्रा से मारपीट जैसी घटना के बाद यह उम्मीद स्वाभाविक है कि कॉलेज प्रशासन और पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करें और सामने आए प्रत्येक तथ्य की पुष्टि करें।
फिलहाल सामने आई जानकारी के आधार पर तस्वीरों को लेकर विवाद को घटना की वजह बताया जा रहा है। हालांकि आरोपों की पूरी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। किसी भी पक्ष को दोषी ठहराने से पहले पुलिस की कार्रवाई और उपलब्ध साक्ष्यों का इंतजार जरूरी है। लेकिन छात्रा से मारपीट ने इतना जरूर दिखा दिया कि कॉलेज की चारदीवारी अपने आप सुरक्षा की गारंटी नहीं बन जाती। शिक्षा के परिसर में अगर विवाद का जवाब हिंसा बन जाए तो व्यवस्था से जवाब मांगना भी उतना ही जरूरी है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। घटना और आरोपों से जुड़े अंतिम तथ्यों की पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक कार्रवाई के आधार पर ही मानी जानी चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।