राजस्थान

डेढ़ किलो का ओवरी ट्यूमर निकाला, 63 वर्षीय महिला 3 दिन में डिस्चार्ज

कोटा में ओवरी ट्यूमर के करीब 1.5 किलो के जटिल मामले की सफल सर्जरी हुई। 63 वर्षीय महिला 3 दिन में चलकर घर गईं और डॉक्टरों ने जांच को जरूरी बताया।

By अजय त्यागी 1 min read
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डेढ़ किलो का ओवरी ट्यूमर निकाला

कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। ईथॉस हॉस्पिटल में 63 वर्षीय महिला के पेट से करीब 1.5 किलो का जटिल ओवरी ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला गया। मरीज लंबे समय से पेट में भारीपन और असहजता महसूस कर रही थीं। जांच में बाएं अंडाशय में बड़े आकार का ट्यूमर मिला। वरिष्ठ लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. रोहित दाधीच ने बताया कि ऑपरेशन में ट्यूमर को एक साथ पूरी तरह निकाल दिया गया और बायां ओवरी भी सुरक्षित रूप से निकाला गया। यानी पेट जिस परेशानी को लंबे समय से ढो रहा था उसका इलाज आखिरकार ऑपरेशन टेबल पर जाकर हुआ।

डेढ़ किलो की गांठ

डॉ. रोहित दाधीच, डॉ. मनमोहन अग्रवाल और उनकी टीम ने मिलकर यह जटिल सर्जरी की। डॉक्टरों के अनुसार पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के सफल रही। मरीज को ऑपरेशन के बाद महज 3 दिन में संतोषजनक स्थिति में डिस्चार्ज कर दिया गया। इतना ही नहीं वह खुद चलकर घर गईं। आमतौर पर अस्पताल में भर्ती होने का नाम सुनते ही मरीज और परिवार लंबी छुट्टी की कल्पना करने लगते हैं लेकिन इस मामले में रिकवरी ने उस धारणा को भी ज्यादा देर टिकने नहीं दिया। हालांकि हर मरीज की स्थिति अलग होती है और रिकवरी भी उसी के अनुसार होती है।

मामला इसलिए भी ध्यान खींचता है क्योंकि मरीज लंबे समय से पेट में भारीपन और असहजता से परेशान थीं। जांच के बाद बाएं अंडाशय में बड़ा ट्यूमर सामने आया। डॉक्टरों ने समय पर उपचार के जरिए इसे निकालने की प्रक्रिया पूरी की। यहां सबसे अहम बात यह है कि पेट में लगातार भारीपन या असामान्य परेशानी को सिर्फ उम्र का असर या सामान्य तकलीफ मानकर टालना ठीक नहीं है। शरीर कई बार संकेत पहले देता है लेकिन इंसान अक्सर उन्हें बाद की तारीख के लिए छोड़ देता है। इस मामले ने उसी आदत पर सवाल खड़ा किया है।

लक्षणों को न टालें

डॉ. दाधीच ने महिलाओं को पेट में लगातार भारीपन, असहजता या किसी असामान्य शिकायत को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी है। समय पर जांच और विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने से गंभीर समस्याओं का उचित उपचार संभव हो सकता है। यह भी जरूरी है कि किसी ट्यूमर को देखकर अपने स्तर पर उसे कैंसर मान लेना सही नहीं है। ट्यूमर की प्रकृति और उपचार का फैसला चिकित्सकीय जांच के बाद ही किया जाता है। इसलिए इंटरनेट पर लक्षण खोजकर खुद डॉक्टर बनने के बजाय वास्तविक डॉक्टर तक पहुंचना कहीं ज्यादा समझदारी है।

ईथॉस हॉस्पिटल में जटिल सर्जिकल मामलों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। इस मामले में ओवरी ट्यूमर निकालने की सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी तेजी से हुई और 3 दिन में उन्हें घर भेज दिया गया। यह परिणाम निश्चित रूप से राहत देने वाला है लेकिन इसे हर मरीज के लिए समान नतीजे की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। ओवरी ट्यूमर जैसी स्थिति में समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन ही सबसे अहम कदम है और लक्षणों को टालना किसी भी लिहाज से समझदारी नहीं है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ओवरी ट्यूमर और उससे जुड़े लक्षणों की प्रकृति हर मरीज में अलग हो सकती है और किसी भी जांच, उपचार या सर्जरी का निर्णय योग्य चिकित्सक की सलाह और आवश्यक चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही लिया जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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