श्रृद्धांजलि

सुहाना सफर और ये मौसम हसीं! सलिल चौधरी के संगीत का अनुपम उदाहरण 

सलिल चौधरी की 31वीं पुण्यतिथि पर जैकी श्रॉफ ने उन्हें याद किया और उनकी अमर धुनों के साथ भारतीय सिनेमा में उनके बड़े योगदान को श्रृद्धांजलि दी।

By अजय त्यागी 1 min read
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जाने माने संगीतकार सलिल चौधरी - फाइल फोटो

मुंबई, महाराष्ट्र। मशहूर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने शनिवार को महान संगीतकार सलिल चौधरी को उनकी 31वीं पुण्यतिथि पर याद किया। जैकी ने सोशल मीडिया पर पियानो के सामने बैठे उनकी श्वेत श्याम तस्वीर साझा कर उन्हें संगीत का दिग्गज बताया। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनकी याद में संदेश लिखा। इस मौके ने फिर याद दिलाया कि उनकी बनाई धुनें आज भी श्रोताओं के दिल में उतनी ही मजबूती से बसी हुई हैं और नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं।  [1]

संगीत का सफर

महान संगीतकार जन्म 19 नवंबर 1925 को बंगाल प्रेसिडेंसी के हरिनावी में हुआ था। वह सिर्फ संगीतकार नहीं थे बल्कि गीतकार, कवि, लेखक और रंगमंच से भी जुड़े रचनाकार थे। उन्होंने हिंदी, बंगाली और मलयालम समेत 13 भाषाओं में फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। बांसुरी, पियानो और एसराज जैसे वाद्य यंत्रों पर उनकी पकड़ भी शानदार थी। उनकी रचनात्मकता ने भारतीय फिल्म संगीत को अलग पहचान देने में बड़ी भूमिका निभाई। उनका का निधन 5 सितंबर 1995 को 69 वर्ष की उम्र में हुआ था। 

हिंदी सिनेमा में सलिल चौधरी की एंट्री बिमल रॉय की फिल्म दो बीघा जमीन से 1953 में हुई। इससे पहले 1949 में बंगाली फिल्म परिवर्तन के लिए उन्होंने संगीत दिया था। 1958 की मधुमती उनके सबसे चर्चित कामों में गिनी जाती है। इस फिल्म में आजा रे परदेसी, सुहाना सफर और ये मौसम हसीं, दिल तड़प तड़प के कह रहा है और घड़ी घड़ी मोरा दिल धड़के जैसे गीत थे। इन धुनों ने उनकी संगीत शैली को घर घर पहुंचाया और उन्हें यादगार फिल्म संगीतकारों में शामिल किया।

धुनों की विरासत

इसके बाद उन्होंने परख के 'ओ सजना बरखा बहार आई', छाया के 'इतना ना मुझसे तू प्यार बढ़ा' और काबुलीवाला के 'ऐ मेरे प्यारे वतन' जैसे गीतों को संगीत दिया। आनंद के 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' और 'जिंदगी कैसी है पहेली' भी उनकी अमर रचनाओं में शामिल हैं। उन्होंने लता मंगेशकर, मुकेश, मन्ना डे, किशोर कुमार और आशा भोसले जैसे बड़े गायकों के साथ काम किया। उनकी धुनों में शास्त्रीय रंग, लोक संवेदना और आधुनिक प्रयोग का ऐसा मेल था जो आज भी अलग सुनाई देता है।

जैकी श्रॉफ की श्रद्धांजलि ऐसे समय में आई है जब पुराने हिंदी फिल्म गीतों को नई पीढ़ी फिर से सुन और खोज रही है। इस महान संगीतकार की खासियत यह थी कि उन्होंने केवल लोकप्रिय धुनें नहीं बनाईं बल्कि संगीत को कहानी और भावनाओं से भी जोड़ा। उनकी बहुभाषी रचनाएं भारतीय संगीत की विविधता का उदाहरण हैं। सलिल चौधरी, जिसने सादगी, संवेदना और प्रयोग के जरिए श्रोताओं के बीच संगीत की लंबी विरासत बनाई उनकी 31वीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रृद्धांजली।

उनके संगीत से सजे कुछ नगमे 

आ जा रे परदेसी — मधुमती (1958) — लता मंगेशकर — गीतकार: शैलेंद्र — संगीत: सलिल चौधरी 
सुहाना सफर और ये मौसम हसीं — मधुमती (1958) — मुकेश — गीतकार: शैलेंद्र — संगीत: सलिल चौधरी
दिल तड़प तड़प के कह रहा है — मधुमती (1958) — मुकेश, लता मंगेशकर — गीतकार: शैलेंद्र — संगीत: सलिल चौधरी
ओ सजना, बरखा बहार आई — परख (1960) — लता मंगेशकर — गीतकार: शैलेंद्र — संगीत: सलिल चौधरी
ऐ मेरे प्यारे वतन — काबुलीवाला (1961) — मन्ना डे — गीतकार: प्रेम धवन — संगीत: सलिल चौधरी
इतना न मुझसे तू प्यार बढ़ा — छाया (1961) — लता मंगेशकर, तलत महमूद — गीतकार: राजेंद्र कृष्ण — संगीत: सलिल चौधरी
कहीं दूर जब दिन ढल जाए — आनंद (1971) — मुकेश — गीतकार: योगेश — संगीत: सलिल चौधरी
मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने — आनंद (1971) — मुकेश — गीतकार: गुलज़ार — संगीत: सलिल चौधरी
ज़िंदगी कैसी ये पहेली हाय — आनंद (1971) — मन्ना डे — गीतकार: योगेश — संगीत: सलिल चौधरी
ना जिया लागे ना — आनंद (1971) — लता मंगेशकर — गीतकार: गुलज़ार — संगीत: सलिल चौधरी
कोई होता जिसको अपना — मेरे अपने (1971) — किशोर कुमार — गीतकार: गुलज़ार — संगीत: सलिल चौधरी
रजनीगंधा फूल तुम्हारे — रजनीगंधा (1974) — लता मंगेशकर — गीतकार: योगेश — संगीत: सलिल चौधरी
कई बार यूँ भी देखा है — रजनीगंधा (1974) — मुकेश — गीतकार: योगेश — संगीत: सलिल चौधरी
जानेमन जानेमन तेरे दो नयन — छोटी सी बात (1976) — के. जे. येसुदास, आशा भोसले — गीतकार: योगेश — संगीत: सलिल चौधरी
न जाने क्यों होता है ये ज़िंदगी के साथ — छोटी सी बात (1976) — लता मंगेशकर — गीतकार: योगेश — संगीत: सलिल चौधरी
आहा रिमझिम के ये प्यारे प्यारे गीत लिए — उसने कहा था (1960) — लता मंगेशकर, तलत महमूद — गीतकार: राजा मेहदी अली खान
रात ने क्या-क्या ख्वाब दिखाए — एक गाँव की कहानी (1957) — लता मंगेशकर — गीतकार: शैलेंद्र — संगीत: सलिल चौधरी
ज़िंदगी ख़्वाब है — जागते रहो (1956) — मुकेश — गीतकार: शैलेंद्र — संगीत: सलिल चौधरी
जागो मोहन प्यारे — जागते रहो (1956) — लता मंगेशकर — गीतकार: शैलेंद्र — संगीत: सलिल चौधरी
तस्वीर तेरी दिल में — माया (1961) — लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी — गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी — संगीत: सलिल चौधरी

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। गीतों और कलाकारों से जुड़ी जानकारी संबंधित स्रोत में उपलब्ध विवरण के आधार पर प्रस्तुत की गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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