गोटमार मेले से पहले पांढुर्णा प्रशासन ने गोफन पर रोक लगा दी है। जाम नदी किनारे होने वाले आयोजन में सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम कड़े रहेंगे।
गोटमार मेला - फाइल फोटो
पांढुर्णा, मध्य प्रदेश। पांढुर्णा में होने वाले विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेले से पहले प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मेले में पत्थरबाजी के दौरान गोफन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक रहेगी। प्रशासन का कहना है कि परंपरा के बीच लोगों की जान और सुरक्षा सबसे जरूरी है। जाम नदी के किनारे होने वाले इस आयोजन में पुलिस और प्रशासन की निगरानी बढ़ाई जाएगी। गोफन पर रोक के साथ नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। गोटमार मेला इस वर्ष 11 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा। [1]
गोटमार मेला पांढुर्णा की पुरानी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा आयोजन है। इसमें पांढुर्णा और सावरगांव के लोग जाम नदी के दोनों किनारों से एक दूसरे पर पत्थर फेंकते हैं और बीच में लगाए गए झंडे तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस परंपरा के दौरान पहले भी बड़ी संख्या में लोग घायल होते रहे हैं। इसी वजह से प्रशासन ने इस बार गोफन के इस्तेमाल को रोकने पर खास जोर दिया है। अधिकारियों ने लोगों से संयम बरतने और तय नियमों का पालन करने की अपील की है।
हाल की शांति समिति की बैठक में मेले की कानून व्यवस्था, यातायात, भीड़ नियंत्रण और नागरिक सुविधाओं को लेकर तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को जरूरी इंतजाम समय से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। मेले के दौरान सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी रखने की तैयारी है। गोफन पर रोक का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि पुरानी परंपरा के दौरान किसी की जान जोखिम में न पड़े और पूरी व्यवस्था नियंत्रण में रहे।
मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के साथ चिकित्सा इंतजाम पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मौके पर डॉक्टर और एंबुलेंस को तैयार रखने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि किसी भी घायल को समय पर मदद मिल सके। प्रशासन ने नागरिकों से शांति, संयम और सद्भाव बनाए रखने की अपील की है। साथ ही लोगों से कहा गया है कि वे प्रशासन की ओर से तय नियमों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। पुलिस की मौजूदगी और निगरानी का मकसद किसी अप्रिय स्थिति को समय रहते रोकना है।
गोटमार मेले की परंपरा स्थानीय लोगों के लिए भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व रखती है, लेकिन पत्थरबाजी के कारण इसके दौरान चोट लगने का खतरा बना रहता है। प्रशासन इस बार आयोजन को परंपरागत रूप में कराने के साथ सुरक्षा घेरा मजबूत कर रहा है। गोफन पर रोक इसी सख्ती का अहम हिस्सा है। अधिकारियों की अपील है कि लोग उत्सव की गरिमा बनाए रखें और ऐसी गतिविधि से बचें जिससे किसी की जिंदगी खतरे में आए। निगरानी और चिकित्सा इंतजामों के बीच प्रशासन शांतिपूर्ण आयोजन की तैयारी में जुटा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। गोटमार मेले से जुड़े आयोजन और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार बदल सकती हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।