साइबर ठगी से बचें और डिजिटल अरेस्ट जैसे फर्जी कॉल से सतर्क रहें, लूणकरनसर में छात्रों को ओटीपी, बैंक डिटेल और स्क्रीन शेयरिंग के खतरे बताए गए।
जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
लूणकरनसर (बीकानेर), राजस्थान। राजकीय भीमसेन चौधरी महाविद्यालय में छात्रों को साइबर अपराध से बचाव और जिम्मेदार नागरिक बनने की सीख दी गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यक्रम में साइबर फ्रॉड के नए तरीकों से सावधान रहने पर जोर रहा। मुख्य वक्ता श्रेयांस बैद ने बताया कि ठग कभी पुलिस या बैंक अधिकारी बनकर तो कभी रिश्तेदार या किसी संस्था का प्रतिनिधि बनकर फोन करते हैं। वे डर पैदा कर ओटीपी, बैंक जानकारी और स्क्रीन शेयर करवाकर रकम उड़ा सकते हैं। साइबर ठगी से बचें और हर कॉल की जांच करें।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराना भी इसी जाल का हिस्सा है। वक्ता ने समझाया कि ठग लोगों को झूठे मुकदमे या गिरफ्तारी का डर दिखाकर वीडियो कॉल पर निगरानी में रहने और पैसे भेजने के लिए दबाव बना सकते हैं। सरकारी साइबर सुरक्षा सलाह में भी ऐसे फर्जी अधिकारी बनकर किए जाने वाले कॉल से सावधान रहने को कहा गया है। किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंक विवरण नहीं देना चाहिए। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचना जरूरी है।
कार्यक्रम में यह भी समझाया गया कि स्क्रीन शेयर करना मामूली बात नहीं है। ठग इसके जरिए मोबाइल पर दिख रही संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। अगर कोई कॉल डराए या तुरंत भुगतान के लिए दबाव डाले तो बातचीत रोककर परिवार या संबंधित संस्था से आधिकारिक नंबर पर संपर्क करना बेहतर है। वित्तीय साइबर ठगी होने पर 1930 हेल्पलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है। समय पर सूचना देने से नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है।
अधिकार मित्र पुष्पेंद्र चौधरी ने युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। एएसआई रामफूल सिंह ने हेलमेट, सीट बेल्ट, गति सीमा और वाहन चलाते समय मोबाइल से दूरी रखने की सलाह दी। उनका कहना था कि यातायात नियमों की पालना केवल अपनी सुरक्षा नहीं बल्कि सड़क पर मौजूद हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। कार्यवाहक प्राचार्य ईश्वर चंद और प्रो गोविंद सारस्वत ने जागरूक होकर मतदान करने की अपील की। प्रो राज किरण और प्रो राकेश ने भी जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी।
महाविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए डिजिटल सुरक्षा, नशामुक्ति, यातायात अनुशासन और मतदान जागरूकता को एक साथ समझने का मौका बना। संदेश साफ रहा कि ऑनलाइन दुनिया में थोड़ी सी जल्दबाजी भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। फर्जी अधिकारी बनकर आने वाली कॉल पर भरोसा करने के बजाय जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि करनी चाहिए। ओटीपी और बैंक संबंधी गोपनीय विवरण हमेशा सुरक्षित रखना चाहिए। साइबर ठगी से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित माध्यम पर दें।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। साइबर अपराध से बचाव के लिए पाठकों को आधिकारिक माध्यमों से जानकारी की पुष्टि करने और किसी संदिग्ध घटना की स्थिति में संबंधित साइबर अपराध सहायता माध्यम से संपर्क करने की सलाह दी जाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।