चूरू में 8 साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोप से हड़कंप मच गया। पुलिस ने BNS और POCSO एक्ट में केस दर्ज कर CCTV से आरोपी की पहचान की और तलाश तेज कर दी।
प्रतीकात्मक फोटो
चूरू, राजस्थान। 8 साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोप का मामला सामने आया है। पीड़िता दूसरी कक्षा में पढ़ती है और अपने नाना के साथ रहती है। शिकायत के मुताबिक बच्ची घर से पीछे की गली में निर्माणाधीन मकान की तरफ जा रही थी। इसी दौरान बाइक सवार एक व्यक्ति ने उसे बुलाया और 500 रुपये देने का लालच दिया। पुलिस अधिकारी कुसुम लता ने बताया कि शिकायत के आधार पर BNS और POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है। [1]
पुलिस के मुताबिक बच्ची के नाना ने शिकायत में बताया कि बाइक सवार व्यक्ति ने बच्ची को 500 रुपये देने का लालच देकर अपने पास बुलाया था। आरोप है कि इसके बाद उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद बच्ची रोते हुए अपने नाना के पास पहुंची और पूरी बात बताई। परिवार उसे लेकर थाने पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की और बच्ची को सरकारी अस्पताल ले जाकर उसका मेडिकल परीक्षण कराया।
पुलिस अधिकारी कुसुम लता के अनुसार शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की जांच के लिए पुलिस की टीमें बनाई गईं। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई। पुलिस का कहना है कि फुटेज की मदद से आरोपी की पहचान कर ली गई है। जांच में सामने आया कि संदिग्ध पास की ही एक गली का रहने वाला है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए तलाश तेज कर दी है। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है और जांच आगे बढ़ रही है।
इस मामले में CCTV फुटेज पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन गई है। पुलिस आसपास के कैमरों की रिकॉर्डिंग के आधार पर आरोपी की गतिविधियों और पहचान से जुड़े तथ्यों को खंगाल रही है। बच्ची से दुष्कर्म के आरोप के मामले में पुलिस ने BNS और POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की है। नाबालिग होने के कारण बच्ची की पहचान से जुड़ी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। मामले में आरोपी की गिरफ्तारी और जांच के बाद ही घटनाक्रम से जुड़े बाकी तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी और नाबालिग पीड़िता की पहचान से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।