ISRO का निजीकरण करने को लेकर 9 कर्मचारी संगठनों ने चेयरमैन वी नारायणन को पत्र लिखकर रॉकेट निर्माण, नौकरियों और भविष्य की भूमिका पर स्पष्ट जवाब मांगा है।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में ISRO का निजीकरण और निजी क्षेत्र को बढ़ती जिम्मेदारियों को लेकर कर्मचारियों की चिंता खुलकर सामने आई है। 9 कर्मचारी संगठनों ने ISRO चेयरमैन वी नारायणन को पत्र भेजकर संगठन की भविष्य की भूमिका पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है। 4 सितंबर को भेजे गए पत्र में विनिर्माण और संचालन से जुड़े काम निजी संस्थाओं को दिए जाने की संभावित दिशा पर सवाल उठाए गए हैं। [1]
कर्मचारी संगठनों ने पूछा है कि क्या ISRO भविष्य में रॉकेट और लॉन्च व्हीकल बनाना बंद कर देगा और इन जिम्मेदारियों को निजी कंपनियों या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को सौंपा जाएगा। यह सवाल IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका के 21 अगस्त के बयान के बाद उठा है। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि भविष्य में ISRO लॉन्च व्हीकल का निर्माण नहीं करेगा और यह काम निजी क्षेत्र या PSU कर सकते हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस दिशा में अभी तक उन्हें औपचारिक सरकारी जानकारी नहीं मिली है।
पत्र में यह भी पूछा गया है कि इस बदलाव का कानूनी और प्रशासनिक आधार क्या है और इसे किस समय सीमा में लागू किया जाना है। कर्मचारियों का कहना है कि तकनीक देश की राष्ट्रीय संपत्ति है और उसका निजी क्षेत्र में हस्तांतरण पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। संगठनों ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि PSLV, LVM3 और SSLV जैसे लॉन्च व्हीकल की डिजाइन, विकास, परीक्षण और प्रक्षेपण से जुड़ी जिम्मेदारियां आगे ISRO के पास रहेंगी या नहीं। इस पूरी प्रक्रिया में कर्मचारियों को स्पष्ट जानकारी देने की मांग की गई है।
ISRO का निजीकरण या उसके कामों का निजी क्षेत्र की ओर संभावित हस्तांतरण केवल संस्थागत भूमिका का मुद्दा नहीं है। कर्मचारी संगठनों ने मौजूदा कर्मचारियों, स्वीकृत पदों, खाली पदों और भविष्य की भर्ती को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर संगठन की उत्पादन और संचालन वाली जिम्मेदारियां कम होती हैं तो वैज्ञानिक, तकनीकी और अन्य कर्मचारियों के लिए भविष्य की स्थिति क्या होगी। भर्ती कैलेंडर और नए कर्मचारियों की नियुक्ति पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह भी पत्र में स्पष्ट करने को कहा गया है।
कर्मचारी संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं। उनकी मुख्य मांग यह है कि सरकार और ISRO अपनी भविष्य की दिशा साफ तौर पर कर्मचारियों के सामने रखें। ISRO का निजीकरण कितना और किस स्तर तक होगा, इसका जवाब मिलने के बाद ही कर्मचारियों को संगठन की बदलती भूमिका का अंदाजा लगेगा। फिलहाल यह मामला रॉकेट निर्माण, तकनीक के हस्तांतरण, नौकरियों और ISRO की स्वायत्त भूमिका से जुड़े कई अहम सवाल सामने ला रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ISRO के निजीकरण से जुड़े प्रस्तावों और बयानों की अंतिम सरकारी नीति, कानूनी स्थिति तथा लागू होने की समयसीमा संबंधित सरकारी निर्णयों से ही स्पष्ट होगी। कर्मचारियों की आशंकाओं को अंतिम सरकारी निर्णय या निजीकरण की पुष्टि के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।