मानहानि केस के बाद सुधीर चौधरी और DD News से जवाब तलब, एक्टिविस्ट ने 5 करोड़ रुपये हर्जाना मांगा, कोर्ट 22 सितंबर को अंतरिम रोक पर सुनवाई करेगा।
प्रतीकात्मक फोटो
दिल्ली, दिल्ली। मानहानि केस के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्रकार सुधीर चौधरी, उनकी प्रोडक्शन कंपनी एस्प्रिट प्रोडक्शंस और प्रसार भारती यानी DD News को नोटिस जारी किया है। यह मुकदमा एक्टिविस्ट विजय शेरावत ने दायर किया है। शेरावत ने आरोप लगाया है कि एक कार्यक्रम में उन्हें लेकर ऐसी बातें कही गईं जिनसे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। उन्होंने इस मामले में 5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों को समन जारी किया। [1]
मामला 27 अगस्त को प्रसारित हुए DECODE कार्यक्रम से जुड़ा है। याचिका के मुताबिक कार्यक्रम में शेरावत की तस्वीर दिखाई गई और उन पर संसद भवन को गिराने तथा भारत में नेपाल जैसी स्थिति बनाने की बात कहने का आरोप लगाया गया। शेरावत का दावा है कि कार्यक्रम में उन्हें राष्ट्र विरोधी के तौर पर पेश किया गया। इसी प्रसारण को आधार बनाकर उन्होंने मानहानि का मुकदमा दायर किया। अदालत ने फिलहाल आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है और प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से 5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग के साथ अंतरिम रोक की भी गुहार लगाई है। उनका आग्रह है कि कथित आरोपों को आगे प्रकाशित या दोबारा प्रसारित करने पर रोक लगाई जाए। अदालत ने इस अंतरिम आवेदन पर तत्काल अंतिम फैसला नहीं दिया। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में प्रतिवादी इस मांग पर अपनी दलीलें पेश करने के लिए तैयार रहें। इस मामले में सुधीर चौधरी के साथ एस्प्रिट प्रोडक्शंस और DD News भी पक्षकार हैं। मानहानि केस में समन जारी होने के बाद अब सभी संबंधित पक्षों का जवाब अहम होगा।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक की मांग पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की है। अदालत के आदेश के मुताबिक अगली तारीख पर प्रतिवादियों से इस आवेदन पर दलीलें रखने की उम्मीद है। इसका मतलब यह नहीं है कि याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप अदालत ने सही मान लिए हैं। अभी मामला शुरुआती चरण में है और दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जानी बाकी हैं। आगे की सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि प्रसारण को लेकर मांगी गई अंतरिम राहत देने का आधार बनता है या नहीं।
यह विवाद मीडिया प्रसारण और किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा से जुड़े कानूनी अधिकारों के बीच संतुलन का सवाल भी उठाता है। मानहानि केस में समन जारी होने के बाद अब अदालत के सामने प्रसारण में लगाए गए आरोपों और उनके प्रभाव से जुड़े पक्ष रखे जाएंगे। शेरावत ने जहां कथित टिप्पणी को अपनी प्रतिष्ठा के लिए नुकसानदेह बताया है वहीं प्रतिवादियों को अपना बचाव पेश करने का अवसर मिलेगा। फिलहाल अदालत ने केवल मामले को आगे बढ़ाते हुए नोटिस जारी किया है और अंतिम दोष या जिम्मेदारी तय नहीं की है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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