रेप केस से नाम हटाने के लिए 1 लाख की मांग, पहली किश्त में 50 हजार की रिश्वत लेते SHO पकड़े गए, थाने में ट्रैप के बाद FIR दर्ज हुई और जांच आगे बढ़ी।
प्रतीकात्मक फोटो
नूंह, हरियाणा। 50 हजार की रिश्वत लेने के आरोप में सिटी पुनहाना थाने के SHO को हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सोमवार को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने रेप केस में एक व्यक्ति के रिश्तेदार का नाम हटाने के लिए 1 लाख रुपये मांगे थे। बाद में रकम 50 हजार रुपये की दो किस्तों में लेने पर सहमति बनी। पहली किस्त लेते समय अधिकारी को उसके थाने के चैंबर से पकड़ा गया और रकम भी बरामद हुई। [1]
मामले की शुरुआत उस शिकायत से हुई जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके मामा के बेटे का नाम रेप केस में गलत तरीके से जोड़ा गया है। उसने दावा किया कि मामला निजी रंजिश के कारण दर्ज कराया गया और वह निष्पक्ष जांच चाहता था। इसी दौरान जांच संभाल रहे इंस्पेक्टर पर 1 लाख रुपये मांगने का आरोप लगा। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने जांच की और ट्रैप की योजना बनाई। बातचीत से जुड़ी आवाज और कॉल रिकॉर्डिंग भी शिकायतकर्ता ने अधिकारियों को उपलब्ध कराई थी।
अधिकारियों के मुताबिक रेप केस 24 जून को पिनंगवां पुलिस थाने में दर्ज हुआ था और बाद में इसकी जांच निष्पक्ष तरीके से करने की जिम्मेदारी संबंधित इंस्पेक्टर को दी गई। आरोप है कि इसी जांच के दौरान नाम हटाने के बदले रकम मांगी गई। अधिकारी ने बाद में पूरी रकम एक साथ लेने के बजाय 50 हजार रुपये की दो किस्तों पर हामी भरी। पहली किस्त देने के लिए शिकायतकर्ता को सिटी पुनहाना थाने बुलाया गया और वहीं एसीबी टीम ने कार्रवाई कर 50 हजार की रिश्वत लेते धर दबोचा।
एसीबी के अनुसार शिकायतकर्ता से मिले रिकॉर्ड और शिकायत के आधार पर ट्रैप को अंजाम दिया गया। कार्रवाई के दौरान अधिकारी को उसके चैंबर में रकम लेते पकड़ा गया और कथित रिश्वत की रकम उसके कब्जे से बरामद हुई। इसके बाद उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत गुरुग्राम स्थित एसीबी थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इस प्रावधान के तहत किसी लोक सेवक द्वारा सरकारी काम को गलत तरीके से प्रभावित करने के लिए अनुचित लाभ लेना अपराध माना गया है।
50 हजार की रिश्वत वाला यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोप सीधे एक ऐसे पुलिस अधिकारी पर लगा है जो संवेदनशील आपराधिक मामले की जांच से जुड़ा था। फिलहाल उपलब्ध जानकारी आरोपों और एसीबी की कार्रवाई पर आधारित है और मामले की आगे की जांच में रिकॉर्डिंग, शिकायत तथा बरामद रकम समेत सभी पहलुओं की पड़ताल होगी। कानून के मुताबिक अंतिम दोष तय होना अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इस कार्रवाई के बाद पुलिस जांच में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर निगरानी को लेकर भी सवाल फिर चर्चा में आ गए हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही मानी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।