प्रादेशिक

महाप्रज्ञ स्कूल में पर्युषण के पहले दिन तपस्या का आध्यात्मिक संदेश

तपस्या का आध्यात्मिक संदेश लेकर शुरू हुए पर्युषण महापर्व में खाद्य संयम, आत्मदर्शन और क्षमा पर जोर रहा। श्रद्धालुओं से भरा परिसर भक्ति में डूबा।

By अजय त्यागी 1 min read
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तपस्या का आध्यात्मिक संदेश

मुंबई, महाराष्ट्र। पर्युषण महापर्व के प्रथम दिवस पर कालबादेवी स्थित महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल का प्रांगण श्रद्धालुओं से भर गया। खाद्य संयम दिवस के साथ पर्व की मंगल शुरुआत हुई और तपस्या का आध्यात्मिक संदेश पूरे आयोजन में प्रमुखता से सामने आया। सामूहिक मंगलाचरण के बाद साध्वीवृंद ने आत्मदर्शन, संयम और क्षमा जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया। सुबह 6 बजे से अखंड जाप शुरू हुआ जो पूरे महापर्व के दौरान जारी रहेगा। भक्ति गीतों और मंगल भावनाओं के बीच श्रावक श्राविकाओं ने उत्साह से धर्माराधना में सहभागिता की।

खाद्य संयम पर जोर

प्रथम दिवस का मुख्य विषय खाद्य संयम दिवस रहा। साध्वीश्री उदितप्रभाजी ने खाद्य संयम के महत्व को विस्तार से समझाया। साध्वीवृंद ने गीत के माध्यम से बताया कि पर्युषण पर्व से मिलने वाली सीख तभी सार्थक है जब वह हमारी जीवनशैली का हिस्सा बने। श्रद्धालुओं को भोजन के साथ अपनी इच्छाओं और आदतों पर नियंत्रण रखने की प्रेरणा दी गई। आयोजन में यह संदेश भी सामने आया कि संयम केवल कुछ दिनों की साधना नहीं बल्कि रोजमर्रा के जीवन में अपनाई जाने वाली आदत बन सकता है। इससे आत्मअनुशासन और आत्मचिंतन को बढ़ावा मिलता है।

शासन श्री साध्वीश्री कंचनप्रभाजी ने कहा कि पर्युषण आते ही लोगों में आत्मदर्शन और आत्मचिंतन की भावना गहरी होने लगती है। उन्होंने बताया कि यह पर्व व्यक्ति को अपने जीवन पर विचार करने का अवसर देता है कि उसने क्या पाया और क्या खोया। मैत्री, करुणा और पवित्रता के साथ आत्मआराधना की भावना जागती है। श्रद्धालु ज्ञान, दर्शन और चरित्र की साधना में जुटते हैं। उनके संदेश में तपस्या का आध्यात्मिक संदेश भी साफ दिखाई दिया। पर्व को उन्होंने भीतर झांकने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर बताया।

क्षमा और कर्म का संदेश

शासन श्री साध्वीश्री मंजूरेखाजी ने कर्मसूक्त के आधार पर प्रवचन करते हुए भगवान पार्श्वनाथ के पूर्व जन्मों से जुड़े प्रसंगों की व्याख्या की। उन्होंने क्षमा याचना के महत्व को समझाते हुए बताया कि आध्यात्मिक साधना व्यक्ति को अपने कर्मों और व्यवहार पर विचार करने की प्रेरणा देती है। उनके प्रवचन में आत्मशुद्धि और विनम्रता का भाव प्रमुख रहा। श्रद्धालुओं के लिए यह संदेश पर्युषण की साधना को जीवन से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पक्ष बना। तपस्या का आध्यात्मिक संदेश ही नहीं, कार्यक्रम में धर्म के साथ आत्मचिंतन और अपने भीतर सुधार लाने की भावना को भी प्रमुखता मिली।

सुबह 6 बजे से अखंड जाप का शुभारंभ हुआ जो पर्युषण महापर्व के सभी दिनों में निरंतर जारी रहेगा। जाप के कारण पूरे परिसर में भक्तिमय और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। प्रतिक्रमण के बाद रात्रिकालीन समय में भी धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। इससे श्रद्धालुओं को दिनभर धर्माराधना के बाद रात में भी अध्यात्म से जुड़े रहने का अवसर मिलेगा। आयोजन का क्रम भक्ति, साधना, संयम और आत्मचिंतन पर केंद्रित है। अखंड जाप के साथ परिसर में लगातार आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का वातावरण बने रहने की उम्मीद है।

संस्थाओं की सहभागिता

पर्युषण महापर्व का आयोजन आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन, श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मंडल और अणुव्रत समिति दक्षिण मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। सभी संस्थाओं के पदाधिकारी और सदस्य प्रथम दिवस के आयोजन में शामिल हुए। सामूहिक मंगलाचरण और भक्ति कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय सहभागिता रही। आयोजन में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी उत्साह के साथ कार्यक्रमों में भाग लिया। इससे पूरे परिसर में सामूहिक आस्था और आत्मीयता का माहौल बना रहा। महापर्व के आगे के दिनों में भी विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।

प्रथम दिवस पर महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में उमड़ी श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने धर्म, साधना और अध्यात्म के प्रति गहरी आस्था को सामने रखा। खाद्य संयम दिवस के माध्यम से भोजन के साथ मन और व्यवहार में संयम का संदेश दिया गया। अखंड जाप, प्रवचन, भक्ति गीत और मंगल भावनाओं ने आयोजन को भक्तिमय बनाए रखा। तपस्या का आध्यात्मिक संदेश भी पूरे कार्यक्रम में दिखाई दिया और श्रद्धालुओं ने तप, क्षमा, आत्मदर्शन तथा आत्मशुद्धि के भाव के साथ महापर्व की शुरुआत की। रात्रिकालीन कार्यक्रमों के साथ यह आध्यात्मिक यात्रा आगे भी जारी रहेगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन से जुड़े विवरण उपलब्ध कराए गए तथ्यों पर आधारित हैं और इन्हें किसी अतिरिक्त धार्मिक निष्कर्ष या आधिकारिक धार्मिक व्याख्या के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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