नेत्रदान से रोशनी का संदेश लेकर महात्मा गांधी अस्पताल में 41वां जागरूकता पखवाड़ा चल रहा है। भ्रांतियां दूर करने, समय पर आंखों की जांच के लिए जागरूक किया गया।
नेत्रदान जागरूकता
भीलवाड़ा, राजस्थान। राजमाता विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महात्मा गांधी अस्पताल का नेत्र विभाग 41वां नेत्रदान जागरूकता पखवाड़ा मना रहा है। विभागाध्यक्ष डॉ. रजनी गौड़ के नेतृत्व में चल रहे अभियान का मकसद नेत्रदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना और लोगों में सकारात्मक सोच विकसित करना है। अभियान में आधुनिक डिजिटल माध्यमों से आंखों की देखभाल और समय पर जांच के महत्व की जानकारी दी जा रही है। नेत्रदान से रोशनी की इस पहल में कम्युनिटी स्तर पर प्रिवेंटिव आई केयर को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
अभियान के तहत स्कूली विद्यार्थियों को डिजिटल स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट, आंखों की सुरक्षा और नियमित जांच के बारे में जागरूक किया जा रहा है। वहीं एमबीबीएस विद्यार्थियों को नेत्रदान और आधुनिक ऑप्थैल्मिक स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल की जानकारी दी जा रही है। विभागाध्यक्ष डॉ. रजनी गौड़ ने बताया कि एक मृत व्यक्ति का नेत्रदान दो लोगों के जीवन में रोशनी ला सकता है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं समाज में मौजूद हैं, जिन्हें वैज्ञानिक जानकारी के जरिए दूर करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों और आम लोगों से लगातार संवाद किया जा रहा है।
डॉ. रजनी गौड़ के अनुसार उम्र को लेकर नेत्रदान के संबंध में कोई निश्चित सीमा नहीं है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अस्थमा से पीड़ित लोग, चश्मा लगाने वाले और मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा चुके व्यक्ति भी परिस्थितियों के अनुसार नेत्रदान कर सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेत्रदान की प्रक्रिया से चेहरे पर कोई विकृति नहीं आती। मृत्यु के बाद कॉर्निया को निर्धारित समय में सुरक्षित करना जरूरी होता है। इसलिए परिजनों को ऐसी इच्छा होने पर जल्द से जल्द संबंधित नेत्र विभाग या नेत्रदान सेवा से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
अभियान के तहत वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. नेहा शर्मा ने सुवाणा ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों को नेत्रदान का संकल्प दिलाया। डॉ. अदिति शर्मा ने ओपीडी में मरीजों और उनके परिजनों से संवाद कर उन्हें नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। नर्सिंग स्टाफ और विद्यार्थियों के लिए सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों और उनके वैज्ञानिक तथ्यों पर चर्चा की गई। साथ ही लोगों को यह समझाया गया कि मृत्यु के बाद समय पर सूचना देना अर्थात जरूरतमंद को नेत्रदान से रोशनी मिलने की उम्मीद जगाना है।
अभियान का उद्देश्य केवल नेत्रदान के संकल्प तक सीमित नहीं है बल्कि कॉर्नियल दृष्टिहीनता से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद पैदा करना भी है। अस्पताल का नेत्र विभाग आंखों की नियमित जांच और बचाव को लेकर भी जागरूकता बढ़ा रहा है। डिजिटल स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच विद्यार्थियों को आंखों की सुरक्षा संबंधी व्यवहारिक जानकारी दी जा रही है। मेडिकल विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों को आधुनिक जांच प्रोटोकॉल की समझ दी जा रही है। इस तरह नेत्रदान से रोशनी की मुहिम को जागरूकता और आंखों की देखभाल दोनों से जोड़ा गया है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नेत्रदान की चिकित्सकीय उपयुक्तता और प्रक्रिया का अंतिम निर्धारण संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक और अधिकृत नेत्रदान सेवा द्वारा किया जाता है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।