मसूद अजहर पर पाकिस्तान के दावे को काबुल ने फिर खारिज किया, अफगान विदेश मंत्रालय ने कहा कि जैश ए मोहम्मद का संस्थापक अफगानिस्तान में नहीं है।
मसूद अजहर - फाइल फोटो
काबुल, अफगानिस्तान। मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान के पुराने दावे पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कहा है कि जैश ए मोहम्मद का संस्थापक मसूद अजहर अफगानिस्तान में मौजूद नहीं है। काबुल ने यह भी दोहराया कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी प्रयासों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा होने वाली है। [1]
पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान भाग गया था और वहीं से अपनी गतिविधियां चला रहा है। इस्लामाबाद का कहना रहा है कि वह मई 2019 में डूरंड लाइन पार कर अफगानिस्तान चला गया था और उसके बाद से पाकिस्तान के हाथ नहीं लगा। लेकिन तालिबान सरकार पहले भी इस दावे को खारिज कर चुकी है। सितंबर 2022 में भी अफगान सरकार के प्रवक्ता ने कहा था कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में नहीं है और पाकिस्तान ने उसकी मौजूदगी को लेकर काबुल से कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया था।
मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान का यह रुख उस समय और चर्चा में है जब देश पर आतंकी संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना हुआ है। पाकिस्तान 2018 से 2022 तक FATF की ग्रे लिस्ट में रहा था। इस दौरान आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक और प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उससे कई कदम उठाने को कहा गया था। बाद में ग्रे लिस्ट से बाहर आने के बावजूद कुछ मामलों पर एशिया पैसिफिक ग्रुप के जरिए निगरानी जारी रही।
आगामी समीक्षा की वजह से मसूद अजहर का मामला फिर महत्वपूर्ण हो गया है। FATF के अनुरोध पर पाकिस्तान की ओर से अजहर को गिरफ्तार करने के प्रयासों को भी निगरानी वाले मुद्दों में शामिल किया गया था। पाकिस्तान ने 2021 में उसे अनुपस्थिति में दोषी ठहराया था। हालांकि उसके खिलाफ वास्तविक गिरफ्तारी नहीं हो सकी। अब काबुल के ताजा बयान ने इस सवाल को फिर हवा दी है कि अगर वह अफगानिस्तान में नहीं है तो पाकिस्तान उसे पकड़ने में अब तक सफल क्यों नहीं हुआ।
भारत के लिए भी यह घटनाक्रम बेहद अहम है क्योंकि मसूद अजहर भारत में कई बड़े आतंकी हमलों के मामलों में वांछित है। उसका नाम 2001 के संसद हमले, 2008 के मुंबई हमलों, 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा हमले से जुड़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मई 2019 में उसे ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया था। भारत लंबे समय से उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग करता रहा है।
काबुल का ताजा बयान पाकिस्तान के उस दावे को कमजोर करता है जिसमें वह मसूद अजहर के अफगानिस्तान में छिपे होने की बात कहता रहा है। हालांकि अफगान अधिकारी के बयान से यह साबित नहीं होता कि मसूद अजहर फिलहाल कहां है। इतना जरूर है कि अफगान सरकार ने उसकी अपने देश में मौजूदगी से इनकार किया है। इस बयान के बाद पाकिस्तान के सामने अपने दावे और आतंकी संगठनों के खिलाफ उठाए गए कदमों को लेकर नए सवालों का सामना करने की चुनौती बढ़ गई है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मसूद अजहर की मौजूदा स्थिति से जुड़े दावे संबंधित सरकारों और उपलब्ध समाचार स्रोतों के बयानों पर आधारित हैं और हम उसकी वर्तमान लोकेशन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।