प्रादेशिक

स्वाध्याय दिवस पर धर्मसभा में गूंजा संदेश, खुद को जानने से बदलेगा जीवन

स्वाध्याय दिवस पर मुंबई में धर्माराधना का माहौल। साध्वियों ने आत्मचिंतन, अनुप्रेक्षा और स्वाध्याय को जीवन बदलने वाली साधना बताते हुए श्रद्धालुओं को प्रेरित किया

By अजय त्यागी 1 min read
Twitter Facebook WhatsApp

स्वाध्याय दिवस की धर्मसभा

मुंबई, महाराष्ट्र। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन स्वाध्याय दिवस के अवसर पर महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल, कालबादेवी में धर्माराधना का विशेष वातावरण देखने को मिला। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रावक और श्राविकाएं प्रवचन का लाभ लेने पहुंचे। दक्षिण मुंबई के साथ दादर, परेल और एलफिंस्टन क्षेत्र के तेरापंथ समाज से भी अनेक श्रद्धालु विशेष रूप से पहुंचे। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, दक्षिण मुंबई की ओर से मंगलाचरण किया गया और इसी के साथ कार्यक्रम का आध्यात्मिक शुभारंभ हुआ। पूरे परिसर में धर्ममय वातावरण बना रहा। स्वाध्याय दिवस ने श्रद्धालुओं को अपने भीतर झांकने, विचारों पर चिंतन करने और जीवन की दिशा को समझने का अवसर दिया। ज्ञानाराधना के साथ आत्मचिंतन को आयोजन में विशेष महत्व मिला।

आत्मचिंतन की राह

शासनश्री साध्वी श्री कंचनप्रभाजी ने कहा कि स्वाध्याय अपने आपको देखने का साधन है। उन्होंने समझाया कि जब स्वाध्याय के साथ विचार और व्यवहार जुड़ते हैं तो व्यक्ति के जीवन में नई शैली स्थापित होती है और मन आत्म उपलब्धि की ओर बढ़ता है। शासनश्री साध्वीश्री मंज़ूरेखाजी ने कहा कि स्वाध्याय के साथ अनुप्रेक्षा का क्रम बन जाए तो व्यक्ति समझने लगता है कि जीवन में उसने वास्तव में क्या खोया और क्या पाया। साध्वीश्री निर्भयप्रभाजी ने स्वाध्याय क्या है विषय पर अपने विचार रखे। उनके संदेशों में ज्ञान को केवल पढ़ने या सुनने तक सीमित रखने के बजाय उसे जीवन में उतारने की प्रेरणा दिखाई दी। स्वाध्याय दिवस का यही संदेश रहा कि आत्मचिंतन के जरिए व्यक्ति अपने विचारों और व्यवहार को बेहतर दिशा दे सकता है।

कार्यक्रम में शासनश्री साध्वीश्री मंज़ूरेखाजी, उदितप्रभाजी, निर्भयप्रभाजी और चेलनाश्रीजी ने सुमधुर गीतों की प्रस्तुति देकर पूरे माहौल को स्वाध्यायमय बना दिया। प्रवचन और गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने धर्माराधना के साथ ज्ञानाराधना का लाभ लिया। साध्वीश्री के वक्तव्यों में बार बार इस बात पर जोर रहा कि स्वाध्याय तभी सार्थक है जब उसका असर व्यक्ति के व्यवहार और जीवन शैली में दिखाई दे। पर्युषण के दौरान आत्मचिंतन, संयम और आध्यात्मिक साधना को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में स्वाध्याय दिवस पर हुई धर्मसभा श्रद्धालुओं के लिए अपने भीतर देखने और अपनी दिशा को समझने का अवसर बनी। दक्षिण मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों से आए समाजजनों की उपस्थिति ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाया तथा सामूहिक धर्माराधना का वातावरण मजबूत किया।

ज्ञान और अनुप्रेक्षा

स्वाध्याय दिवस के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं ने आत्मचिंतन, ज्ञानाराधना और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में साध्वीश्री कंचनप्रभाजी, मंज़ूरेखाजी, उदितप्रभाजी, निर्भयप्रभाजी और चेलनाश्रीजी के संदेशों ने स्वाध्याय को जीवन से जोड़ने की प्रेरणा दी। श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय मौजूदगी ने पर्युषण महापर्व के प्रति समाज की आस्था और सहभागिता को भी सामने रखा। दादर, परेल और एलफिंस्टन सहित दक्षिण मुंबई के अलग अलग क्षेत्रों से आए लोगों ने विशेष प्रवचन का लाभ लिया। स्वाध्याय दिवस का भाव केवल धार्मिक पाठ या श्रवण तक सीमित नहीं रहा बल्कि स्वयं को समझने और अपने जीवन की कमियों तथा उपलब्धियों पर विचार करने से जुड़ा रहा। यही कारण रहा कि धर्मसभा में आत्मावलोकन और व्यवहार परिवर्तन का संदेश प्रमुखता से उभरा।

स्वाध्याय दिवस की धर्मसभा ने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि ज्ञान का वास्तविक लाभ तभी है जब वह सोच और व्यवहार में बदलाव लाए। साध्वीश्री मंज़ूरेखाजी के अनुप्रेक्षा संबंधी संदेश ने जीवन में खोने और पाने के सवालों पर विचार करने की प्रेरणा दी। साध्वीश्री कंचनप्रभाजी ने स्वाध्याय को स्वयं को देखने की प्रक्रिया से जोड़ा। साध्वीश्री निर्भयप्रभाजी ने स्वाध्याय के स्वरूप पर विचार रखा। वहीं साध्वीश्री मंज़ूरेखाजी, उदितप्रभाजी, निर्भयप्रभाजी और चेलनाश्रीजी की गीत प्रस्तुति ने वातावरण को और भावपूर्ण बना दिया। पर्युषण के पावन दिनों में समाजजनों की यह सक्रिय सहभागिता आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को बढ़ाने वाली रही। स्वाध्याय दिवस पर लिया गया आत्मचिंतन और ज्ञानाराधना का संकल्प श्रद्धालुओं के लिए धर्म साधना को जीवन व्यवहार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश बनकर सामने आया।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक आयोजन से संबंधित वक्तव्य और कार्यक्रम की जानकारी आयोजकों तथा उपलब्ध समाचार स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट में व्यक्त आध्यात्मिक विचार संबंधित साध्वीश्री के वक्तव्यों का सार हैं और इन्हें व्यक्तिगत आस्था एवं धार्मिक संदर्भ में समझा जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

#Mumbai #Paryushan #SwadhyayDiwas #Terapanth #JainDharma #Kalbadevi #Spirituality
Read Full Article on RexTV India