रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंचे। BRICS से पहले प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात में व्यापार, रक्षा और वैश्विक राजनीति को लेकर दुनिया की नजर है।
पुतिन भारत पहुंचे
नई दिल्ली, दिल्ली। शुक्रवार सुबह पुतिन भारत पहुंचे, उनका नई दिल्ली में आगमन पर स्वागत हुआ। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत के दौरे पर आए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत होनी है। TNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह यात्रा भारत रूस संबंधों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। दोनों नेताओं की बातचीत में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। BRICS सम्मेलन से ठीक पहले पुतिन की मौजूदगी ने इस यात्रा का रणनीतिक महत्व और बढ़ा दिया है। [1]
पुतिन भारत पहुंचे तो सबसे ज्यादा नजर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होने वाली मुलाकात पर टिक गई। दोनों नेता भारत और रूस के लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक रिश्तों को आगे बढ़ाने पर चर्चा कर सकते हैं। मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच यह बातचीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस और भारत के रिश्ते कई मोर्चों पर लगातार बने हुए हैं। ऊर्जा सहयोग, रक्षा साझेदारी और व्यापार के अलावा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी बातचीत की संभावना है। दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने के लिए यह बैठक अहम मंच साबित हो सकती है।
पुतिन भारत पहुंचे हैं तो रक्षा सहयोग भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकता है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से सैन्य और तकनीकी सहयोग रहा है। दोनों पक्ष रक्षा उत्पादन में साझेदारी बढ़ाने और मौजूदा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा कर सकते हैं। ऊर्जा क्षेत्र भी दोनों देशों के रिश्तों का अहम आधार है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति महत्वपूर्ण है। ऐसे में पुतिन और मोदी की बातचीत में ऊर्जा सहयोग और व्यापार से जुड़े रास्तों पर भी विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है।
पुतिन भारत पहुंचे ऐसे समय में हैं जब नई दिल्ली 12 और 13 सितंबर को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रही है। रूस इस समूह का प्रमुख सदस्य है और पुतिन की मौजूदगी सम्मेलन को खास महत्व देती है। BRICS में आर्थिक सहयोग के साथ वैश्विक राजनीति, व्यापार और बहुपक्षीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। पश्चिम एशिया और यूक्रेन जैसे अंतरराष्ट्रीय संकटों के बीच समूह के सामने साझा रुख बनाने की चुनौती भी है। भारत के लिए सम्मेलन का उद्देश्य अलग अलग देशों के हितों को साथ रखते हुए सहयोग का व्यावहारिक रास्ता तलाशना होगा।
पुतिन भारत पहुंचे हैं तो यह यात्रा सिर्फ भारत रूस संबंधों तक सीमित नहीं मानी जा रही। BRICS के मंच पर रूस, चीन, भारत और दूसरे सदस्य देशों के बीच बातचीत ऐसे समय हो रही है जब दुनिया कई बड़े संघर्षों और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है। भारत एक तरफ रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक रिश्ते मजबूत करना चाहता है तो दूसरी तरफ अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ भी संतुलन बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। मोदी और पुतिन की मुलाकात तथा BRICS सम्मेलन से निकलने वाले संदेश आने वाले दिनों की कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, नेताओं के बयानों और द्विपक्षीय बातचीत के एजेंडे में बदलाव संभव है इसलिए पाठकों को अंतिम फैसलों के लिए आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।