जहाजों की सुरक्षा को लेकर भारत की चिंता बढ़ी, पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से समुद्री आवाजाही, व्यापार और क्षेत्रीय शांति पर अहम बातचीत की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन - फाइल
नई दिल्ली, दिल्ली। जहाजों की सुरक्षा को लेकर भारत ने ईरान के सामने अपनी चिंता साफ तौर पर रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ द्विपक्षीय बैठक में समुद्री रास्तों से सुरक्षित आवाजाही और व्यापार की आजादी पर जोर दिया। भारत की चिंता खास तौर पर पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम को लेकर है। बैठक में प्रधानमंत्री ने नाविकों की सुरक्षा और उनके कल्याण को भी अहम मुद्दा बताया। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब क्षेत्र में संघर्ष का असर ऊर्जा और वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है। [1]
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समुद्री रास्तों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही वैश्विक व्यापार के लिए बेहद जरूरी है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कई अहम समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता बढ़ी है और इसका असर तेल तथा दूसरे जरूरी सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है। भारत बड़ी मात्रा में ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर है। ऐसे में समुद्री रास्तों की सुरक्षा सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जरूरतों से जुड़ जाती है। मोदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए लगातार प्रयास जारी रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।
ईरान के साथ बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व भी खास तौर पर सामने आता है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर तेजी से पड़ सकता है। हालिया तनाव के बीच जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और समुद्री सुरक्षा को लेकर कंपनियों तथा देशों की चिंता बढ़ी है। भारत चाहता है कि व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित और निर्बाध रास्ता बना रहे। जहाजों की सुरक्षा का मुद्दा उठाकर नई दिल्ली ने यह संकेत दिया है कि वह क्षेत्रीय तनाव के बीच अपने व्यापार और ऊर्जा हितों को लेकर सतर्क है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन के बीच बातचीत केवल समुद्री सुरक्षा तक सीमित नहीं रही। दोनों देशों के संबंधों और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा हुई। भारत लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए संघर्ष का समाधान निकालने की वकालत करता रहा है। मोदी ने भी क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए बातचीत की जरूरत दोहराई। ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया का तनाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ वैश्विक कारोबार को भी प्रभावित कर रहा है। ऐसे माहौल में दोनों देशों के बीच सीधा संवाद भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को कैसे सुरक्षित रखा जाए। जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित होने से न केवल भारतीय कारोबार को राहत मिलेगी बल्कि तेल और दूसरे जरूरी सामान की आवाजाही भी सुचारु रह सकती है। मोदी और पेजेशकियन की बातचीत में इसी व्यापक चिंता की झलक दिखाई दी। भारत ने साफ किया है कि समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र आवाजाही और व्यापार की सुरक्षा जरूरी है। आगे दोनों देशों के संपर्क और क्षेत्रीय कूटनीति से यह तय होगा कि तनाव कम करने और समुद्री कारोबार को सुरक्षित रखने में कितनी प्रगति होती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। पश्चिम एशिया में सैन्य और समुद्री परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं इसलिए किसी भी निर्णय से पहले ताजा आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूरी है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।