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ओरंगुटान की वापसी से पहले बड़ा सवाल, भारत में कैसे पहुंचे ये 5 बच्चे

ओरंगुटान की वापसी पर भारत में जांच जारी, इंडोनेशिया ने तकनीकी तैयारी शुरू की, तस्करी के शक के बीच डीएनए और कागजी प्रक्रिया पर नजर।

By अजय त्यागी 1 min read
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ओडिशा के जंगल में मिले ओरंगुटान के 5 बच्चे

बालासोर, ओडिशा। ओरंगुटान की वापसी को लेकर भारत और इंडोनेशिया के बीच प्रक्रिया आगे बढ़ती दिख रही है। ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल से 8 सितंबर को मिले 5 नन्हे ओरंगुटान फिलहाल भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में निगरानी और क्वारंटीन में हैं। इंडोनेशिया के वन मंत्रालय ने भारत से संपर्क कर कहा है कि अगर जांच में इनका मूल इंडोनेशिया साबित होता है तो उन्हें वापस भेजने की तैयारी की जाएगी। शुरुआती आकलन में इनके सुमात्रा से होने की आशंका जताई गई है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की भूमिका की जांच भी गंभीरता से चल रही है।  [1]

जांच में शक

भारत में जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये बच्चे ओडिशा के जंगल तक पहुंचे कैसे। ओरंगुटान भारत के प्राकृतिक वन्यजीव नहीं हैं और जंगल में इनके अपने दम पर पहुंचने का कोई प्राकृतिक रास्ता भी नहीं है। अधिकारियों को शक है कि इन्हें अवैध तरीके से भारत लाया गया और किसी वजह से जंगल में छोड़ दिया गया। ओडिशा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो मामले की जांच कर रहे हैं। जांच एजेंसियां संभावित तस्करी मार्ग, भारत में प्रवेश के रास्ते और किसी दूसरे देश के ट्रांजिट प्वाइंट की जानकारी जुटा रही हैं।

इंडोनेशिया ने भारत से इन जानवरों की प्रजाति, स्वास्थ्य, आनुवंशिक नमूनों और जांच की स्थिति से जुड़ी जानकारी मांगी है। वहां के अधिकारियों ने कहा है कि अगर डीएनए जांच से इनके इंडोनेशिया से होने की पुष्टि होती है तो संबंधित अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सीआईटीईएस यानी वन्यजीवों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने वाली संधि की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। इंडोनेशिया तकनीकी स्तर पर स्वास्थ्य जांच, क्वारंटीन, आनुवंशिक पहचान, सुरक्षित परिवहन और वहां पहुंचने के बाद पुनर्वास की तैयारी कर रहा है। हालांकि अंतिम फैसला भारत की जांच और जरूरी कानूनी अनुमति के बाद ही होगा।

वापसी की राह

इन 5 बच्चों की हालत फिलहाल निगरानी में बताई जा रही है। नंदनकानन में उन्हें तापमान नियंत्रित क्वारंटीन सुविधा में रखा गया है और देखभाल के लिए भोजन, खिलौने तथा दूसरी गतिविधियां दी जा रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी कम उम्र में मां से अलग होना और हजारों किलोमीटर की यात्रा इनके लिए तनावपूर्ण हो सकती है। इसलिए डीएनए नमूने लेने की प्रक्रिया भी तुरंत नहीं की गई है और उन्हें वातावरण के अनुकूल होने का समय दिया जा रहा है। अगर आगे ओरंगुटान की वापसी तय होती है तो स्वास्थ्य और व्यवहार संबंधी जांच इसकी अहम शर्त होगी।

इंडोनेशिया पहुंचने के बाद भी इन बच्चों को सीधे जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक उन्हें पहले क्वारंटीन और स्वास्थ्य जांच से गुजरना होगा। इसके बाद पुनर्वास केंद्र या फॉरेस्ट स्कूल जैसी व्यवस्था में उन्हें प्राकृतिक वातावरण के लिए तैयार किया जा सकता है। ओरंगुटान आम तौर पर अपनी मां के साथ कई वर्षों तक रहते हैं इसलिए इतनी कम उम्र में जंगल में स्वतंत्र जीवन शुरू करना आसान नहीं होगा। इसी वजह से सुरक्षित पुनर्वास जरूरी माना जा रहा है। ओरंगुटान की वापसी केवल सीमा पार भेजने की प्रक्रिया नहीं बल्कि संरक्षण और वन्यजीव अपराध से जुड़ा संवेदनशील मामला भी है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ओरंगुटान की वापसी का अंतिम निर्णय जांच, डीएनए पहचान, कानूनी अनुमति और संबंधित देशों के बीच तय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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