भारत ईयू डील अंतिम मंजूरी के करीब पहुंच गई है। यूरोपीय आयोग ने भारत और यूरोपीय संघ EU के बीच व्यापार समझौते का प्रस्ताव यूरोपीय परिषद को भेज दिया है।
भारत ईयू डील वार्ता
नई दिल्ली, दिल्ली। भारत ईयू डील अब अंतिम मंजूरी के बेहद करीब पहुंच गई है। यूरोपीय आयोग ने भारत और यूरोपीय संघ यानी European Union (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए प्रस्ताव यूरोपीय परिषद को भेज दिया है। इसका मतलब है कि लंबे समय से चल रही बातचीत अब हस्ताक्षर और मंजूरी के चरण में पहुंच गई है। समझौता लागू होने के बाद दोनों पक्षों के बीच सामान और सेवाओं का कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। भारत के लिए खास बात यह है कि उसके निर्यात के व्यापार मूल्य का 99 फीसदी से ज्यादा हिस्सा यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच हासिल कर सकेगा। [1]
इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ भारत से आने वाले करीब 96 फीसदी सामान पर शुल्क कम या खत्म करेगा। इससे भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी होने का मौका मिलेगा। यूरोपीय आयोग के मुताबिक टैरिफ में कमी से यूरोपीय कंपनियों को भी भारतीय बाजार में अपने उत्पाद बेचने पर हर साल करीब 4 अरब यूरो के शुल्क की बचत हो सकती है। भारत की तरफ से कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न आभूषण, हस्तशिल्प और इंजीनियरिंग जैसे रोजगार देने वाले क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों के लिए यूरोप एक बड़ा और महत्वपूर्ण बाजार है।
भारत ईयू डील में सेवाओं के साथ कुशल भारतीय पेशेवरों की आवाजाही से जुड़ा ढांचा भी शामिल है। इसका फायदा सिर्फ सामान बेचने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। आईटी, पेशेवर सेवाओं और दूसरे सेवा क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीयों के लिए यूरोप में अवसर बढ़ सकते हैं। दोनों पक्षों के बीच कारोबार पहले ही बड़े स्तर पर है। 2025 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच सामान का व्यापार 118 अरब यूरो तक पहुंच गया था। ऐसे में शुल्क और कारोबारी बाधाएं घटने से कंपनियों के लिए बाजार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं।
अब इस समझौते पर यूरोपीय परिषद की औपचारिक मंजूरी अहम है। परिषद में यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के शीर्ष नेता शामिल हैं और यही संस्था संघ की व्यापक राजनीतिक दिशा तय करती है। परिषद की मंजूरी के बाद समझौते पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और इसके बाद यूरोपीय संसद की सहमति भी जरूरी होगी। भारत में भी अपनी आंतरिक मंजूरी प्रक्रिया चल रही है। इसलिए समझौता बातचीत के स्तर से काफी आगे निकल चुका है लेकिन इसके पूरी तरह लागू होने से पहले कुछ संवैधानिक और कानूनी चरण अभी बाकी हैं।
भारत ईयू डील से भारत को यूरोप के बड़े बाजार में निर्यात बढ़ाने का मौका मिल सकता है। खासकर श्रम आधारित उद्योगों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है क्योंकि शुल्क घटने से भारतीय उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं। दूसरी तरफ यूरोपीय कंपनियों को भारत के विशाल बाजार में मशीनरी, परिवहन उपकरण, रसायन और दूसरे उत्पादों के लिए बेहतर पहुंच मिलेगी। दोनों पक्ष चीन पर अपनी आपूर्ति निर्भरता घटाने और वैकल्पिक कारोबारी साझेदारियां मजबूत करने की कोशिश भी कर रहे हैं। इसलिए यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं बल्कि भारत और यूरोप के व्यापक आर्थिक रिश्तों के लिए भी अहम माना जा रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। समझौते के अंतिम लागू होने के लिए यूरोपीय परिषद, यूरोपीय संसद और भारत की संबंधित आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी होना जरूरी है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।