फर्जी स्टांप बेचने के मामले में तीनों आरोपितों को जमानत मिल गई है। पहले सीजेएम कोर्ट ने अर्जी खारिज की थी, अब जिला जज कोर्ट से राहत मिली।
प्रतीकात्मक फोटो
मुजफ्फरपुर, बिहार। फर्जी स्टांप बेचने के मामले में गिरफ्तार तीन आरोपितों को अदालत से बड़ी राहत मिली है। मुजफ्फरपुर कचहरी परिसर में फर्जी ज्यूडिशियल स्टांप बेचने के आरोप में गिरफ्तार मुरारी कुमार, प्रभात चौधरी और राजेश कुमार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने जमानत दे दी। तीनों को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी यानी सीजेएम कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जियां खारिज कर दी थीं। मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है और आरोपितों पर लगे आरोपों का अंतिम फैसला अदालत की आगे की प्रक्रिया में होगा। [1]
फर्जी स्टांप बेचने के इस मामले में पुलिस ने कचहरी परिसर से जब्त ज्यूडिशियल स्टांप, वेलफेयर टिकट और कोर्ट फीस टिकट की जांच कराई थी। प्रशासनिक जांच में ये सामग्री फर्जी पाई गई थी। इसके बाद 21 अगस्त को नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई और चार लोगों को आरोपित बनाया गया। इनमें मुरारी कुमार, राजेश कुमार, प्रभात चौधरी और सत्यम कुमार के नाम शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था जबकि सत्यम कुमार के संबंध में पुलिस ने अलग कार्रवाई की थी। अब गिरफ्तार तीनों को ऊपरी अदालत से जमानत मिलने के बाद मामले ने नया कानूनी मोड़ लिया है।
फर्जी स्टांप बेचने की जांच के दौरान पुलिस अधिकारी कचहरी परिसर भी पहुंचे थे। जांच अधिकारी और नगर थाने के दारोगा मुन्ना कुमार ने वहां कुछ लोगों से पूछताछ कर मामले से जुड़ी जानकारी जुटाई थी। प्राथमिकी कार्यपालक दंडाधिकारी पूर्वी रामनाथ कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई थी। प्रशासन को कचहरी परिसर में बिक रहे कुछ स्टांप और टिकटों की प्रमाणिकता पर शक हुआ था। इसके बाद नमूनों की जांच कराई गई और उन्हें फर्जी बताया गया। पुलिस अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि इन टिकटों की आपूर्ति कहां से हुई और इस मामले में किसी दूसरे व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।
फर्जी स्टांप बेचने के मामले में जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया है। जमानत केवल हिरासत से राहत है और मामले की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रह सकती है। इस प्रकरण में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल नकली ज्यूडिशियल स्टांप और टिकटों के स्रोत का है। जांच में यह भी देखा जा सकता है कि इन्हें कहां तैयार किया गया और कचहरी परिसर तक कैसे पहुंचाया गया। प्रशासन की शुरुआती कार्रवाई के बाद अधिकृत स्टांप बिक्री व्यवस्था को लेकर भी निगरानी बढ़ाई गई है ताकि दोबारा ऐसी शिकायत सामने न आए।
फर्जी स्टांप बेचने के आरोपों ने कचहरी परिसर में स्टांप और कोर्ट फीस टिकट की बिक्री व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। ज्यूडिशियल स्टांप और कोर्ट फीस टिकट कानूनी प्रक्रिया से जुड़े अहम दस्तावेज होते हैं इसलिए इनके नकली होने का असर आम लोगों और न्यायिक कामकाज दोनों पर पड़ सकता है। फिलहाल तीनों आरोपितों को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत से जमानत मिल चुकी है लेकिन मामले की जांच खत्म नहीं हुई है। आगे की कार्रवाई से यह साफ हो सकता है कि फर्जी स्टांप बेचने के पीछे केवल स्थानीय स्तर की भूमिका थी या इसके तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। आरोपितों को जमानत मिलना दोषसिद्धि या दोषमुक्ति का अंतिम फैसला नहीं है और मामले की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।