परमाणु जोखिम पर BRICS की चिंता ने दुनिया का ध्यान खींचा है। नई दिल्ली घोषणा में परमाणु सुरक्षा, हथियार नियंत्रण और संघर्ष रोकने पर जोर दिया गया।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। BRICS नेताओं ने नई दिल्ली घोषणा में परमाणु जोखिम पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि परमाणु सुरक्षा और सुरक्षा उपायों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेताओं ने नागरिक ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA की निगरानी में चल रही शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर जानबूझकर किए गए हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई। घोषणा में कहा गया कि युद्ध जैसे हालात में भी परमाणु सुरक्षा, सुरक्षा उपाय और संरक्षण व्यवस्था कायम रहनी चाहिए, ताकि लोगों और पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके। [1]
नई दिल्ली घोषणा को सम्मेलन के पहले दिन सर्वसम्मति से मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा की और उस समय चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई नेता मौजूद थे। यह सहमति ऐसे समय बनी जब पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच मतभेद थे। भारत के लिए इसे अहम कूटनीतिक उपलब्धि माना गया क्योंकि सदस्य देशों ने मतभेदों के बावजूद साझा घोषणा पर सहमति बनाई।
घोषणा में किसी देश का नाम लेकर पश्चिम एशिया के मौजूदा सैन्य घटनाक्रम पर सीधा आरोप नहीं लगाया गया। खास तौर पर अमेरिका के ईरान पर हमलों और ईरानी सेना के खाड़ी अरब देशों पर हमलों का सीधे उल्लेख नहीं किया गया। इसके बजाय BRICS ने अंतरराष्ट्रीय कानून और IAEA के संबंधित प्रस्तावों के पालन पर जोर दिया। नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाना गंभीर चिंता का विषय है। परमाणु जोखिम को रोकने के लिए निरस्त्रीकरण, हथियार नियंत्रण और परमाणु अप्रसार की व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।
घोषणा में परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों को वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया गया। BRICS नेताओं ने मौजूदा परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों के समर्थन और सम्मान की बात दोहराई। उन्होंने मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों और दूसरे सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाने की कोशिशों को तेज करने पर भी जोर दिया। संबंधित सम्मेलन में आमंत्रित सभी पक्षों से ईमानदारी के साथ शामिल होने और रचनात्मक तरीके से बातचीत करने की अपील की गई। समूह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 79 241 के तहत परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों पर व्यापक अध्ययन के सर्वसम्मति से पूरा होने का भी उल्लेख किया।
BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हुए हैं, जबकि इंडोनेशिया 2025 में पूर्ण सदस्य बना। पिछले साल बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम साझेदार देशों के रूप में जुड़े। ऐसे विस्तारित समूह में अलग अलग रणनीतिक हितों के बावजूद परमाणु सुरक्षा पर साझा भाषा सामने आना अहम माना जा रहा है। परमाणु जोखिम को लेकर चिंता के साथ घोषणा ने बातचीत, हथियार नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को तनाव घटाने का रास्ता बताया है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। परमाणु सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष से जुड़े विषयों की स्थिति समय के साथ बदल सकती है इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक स्रोतों और ताजा सूचनाओं की पुष्टि करना जरूरी है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।