फर्जी IAS तृप्ति के मामले में खुले नए राज। आरोप है कि पुलिस बल के साथ सरकारी दफ्तरों में पहुंचकर अफसर जैसी जांच और निरीक्षण करती थी।
फर्जी IAS तृप्ति - फाइल फोटो
भोपाल, मध्य प्रदेश। फर्जी IAS तृप्ति के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ उसकी कथित गतिविधियों के नए पहलू सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि वह खुद को प्रभावशाली सरकारी अधिकारी बताकर लोगों पर रौब जमाती थी और पुलिस बल के साथ सरकारी दफ्तरों में निरीक्षण करने तक पहुंच जाती थी। अयोध्यानगर क्षेत्र के एक सरकारी दफ्तर में भी उसके पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले वह सरकारी नौकरी, पर्यटन विभाग से जुड़े काम और दूसरे लाभ दिलाने का भरोसा देकर लोगों से कथित तौर पर पैसे लेने के आरोपों में जांच के घेरे में आ चुकी है। [1]
पुलिस के मुताबिक तृप्ति खुद को अलग अलग सरकारी पदों पर तैनात अधिकारी बताती थी। वह अपने प्रभाव का ऐसा माहौल तैयार करती थी कि सामने वाला उसकी पहचान पर आसानी से शक न करे। इसी कथित तरीके का इस्तेमाल सरकारी दफ्तरों में पहुंचने के दौरान भी किया गया। पुलिस बल की मौजूदगी से उसकी अफसरी की छवि और मजबूत दिखाई देती थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने किन दफ्तरों का दौरा किया, वहां किस तरह की जानकारी हासिल की और क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी ने उसकी पहचान की पुष्टि किए बिना उसे सरकारी कामकाज देखने की अनुमति दी।
तृप्ति के खिलाफ पहले से ही कई गंभीर शिकायतें और मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस के अनुसार उसने चंदेरी में कुछ युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर कथित तौर पर रकम और दस्तावेज लिए थे। भोपाल में भी होटल और पर्यटन संपत्तियों से जुड़े काम दिलाने के नाम पर ठगी के आरोप सामने आए। उसके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच में फर्जी सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेज और दूसरी सामग्री मिलने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि सरकारी अधिकारी जैसी पहचान बनाने के लिए उसने किन संसाधनों का इस्तेमाल किया और इस पूरे खेल में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
फर्जी IAS तृप्ति से जुड़े मामले में सोशल मीडिया गतिविधियां भी जांच का अहम हिस्सा बनी हुई हैं। उसके वीडियो और सरकारी परिसर में मौजूदगी से जुड़े फुटेज ने पुलिस का ध्यान खींचा। आरोप है कि वह इन तस्वीरों और वीडियो के जरिए लोगों के बीच अपनी अफसरी का प्रभाव बनाती थी। पुलिस अब डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेजों और कथित ठगी से जुड़े लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। जांच का एक अहम सवाल यह भी है कि उसने सरकारी दफ्तरों तक पहुंच बनाने के लिए किस पहचान या सिफारिश का सहारा लिया। उसके साथ जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि एक कथित फर्जी पहचान के सहारे सरकारी व्यवस्था के भीतर तक पहुंच बनाने का आरोप सामने आया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तृप्ति ने कितने लोगों को प्रभावित किया और कितनी जगहों पर अधिकारी बनकर पहुंची। उसके भाई और कथित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच हो रही है। आगे की पूछताछ में सरकारी दफ्तरों में किए गए निरीक्षण और वहां उसकी गतिविधियों से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं। फर्जी IAS तृप्ति मामले में पुलिस की जांच अब कथित ठगी से आगे बढ़कर पूरे नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली पर केंद्रित हो गई है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मामले में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और अदालत द्वारा दोष सिद्ध होने तक किसी भी आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।