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केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन: रोकी यात्रा, यात्रियों को गौरीकुंड भेजा

केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन के बाद चिरबासा में यात्रा रोक दी गई। तीर्थयात्रियों को सुरक्षा के लिए गौरीकुंड की ओर भेजा जा रहा है और रास्ता साफ करने का काम जारी है।

By अजय त्यागी 1 min read
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केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन

रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड। केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन के बाद चिरबासा इलाके में यात्रा प्रभावित हुई है। पहाड़ी से चट्टानें गिरने के बाद प्रशासन ने इस हिस्से में आवाजाही रोक दी है। ETV भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, रास्ते में मौजूद तीर्थयात्रियों को सुरक्षा के मद्देनजर गौरीकुंड की ओर वापस भेजा जा रहा है। फिलहाल प्राथमिकता यात्रियों को सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाने और रास्ते को दोबारा खोलने की है। प्रशासन और संबंधित टीमें मौके की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।  [1]

चिरबासा में रास्ता बंद

केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन के बाद चिरबासा में ट्रैक पर आवाजाही रोकना जरूरी माना गया है। पहाड़ी इलाकों में अचानक गिरने वाली चट्टानों और मलबे से यात्रियों के लिए खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि प्रशासन ने तीर्थयात्रियों को आगे बढ़ने से रोकते हुए उन्हें सुरक्षित दिशा में ले जाने का फैसला किया। रास्ते पर मौजूद लोगों को समूह में गौरीकुंड की तरफ भेजा जा रहा है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

केदारनाथ धाम की यात्रा का मुख्य पैदल मार्ग गौरीकुंड से आगे जाता है और सामान्य परिस्थितियों में तीर्थयात्री इसी रास्ते से मंदिर तक पहुंचते हैं। ऐसे में चिरबासा जैसे संवेदनशील हिस्से में रास्ता बंद होने का सीधा असर यात्रियों की आवाजाही पर पड़ता है। फिलहाल यात्रियों को धैर्य रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। रास्ते की स्थिति सामान्य होने तक आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सुरक्षा पर प्रशासन का जोर

केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन के बाद प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती यात्रियों को सुरक्षित रखना है। पहाड़ी रास्तों पर एक बार चट्टानें गिरने के बाद आसपास की ढलानों से दोबारा मलबा आने की आशंका बनी रहती है। इसलिए केवल रास्ते से दिखाई देने वाले पत्थर हटाना पर्याप्त नहीं होता। संबंधित टीमें स्थिति का जायजा लेकर सुरक्षित आवाजाही का रास्ता तैयार करती हैं। यात्रियों को भी जोखिम वाले हिस्सों में रुकने या अपनी मर्जी से आगे बढ़ने से बचना होगा।

फिलहाल तीर्थयात्रियों को गौरीकुंड की ओर सुरक्षित तरीके से भेजा जा रहा है और रास्ता बहाल करने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन की ओर से आगे की यात्रा को लेकर फैसला मौके की स्थिति देखने के बाद लिया जाएगा। केदारनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह घटना एक बार फिर पहाड़ी मौसम और रास्तों की अनिश्चितता की याद दिलाती है। यात्रा शुरू करने से पहले प्रशासन की ताजा सूचना लेना जरूरी है और किसी भी बंद रास्ते पर आगे बढ़ने से बचना चाहिए।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। भूस्खलन के बाद यात्रा की स्थिति मौसम और प्रशासनिक आकलन के अनुसार बदल सकती है। तीर्थयात्रियों को यात्रा से पहले आधिकारिक प्रशासनिक सूचना और स्थानीय सुरक्षा निर्देशों की पुष्टि करनी चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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