दिल्ली

इंजीनियर्स डे पर मोदी का संदेश, इंजीनियर देश की बड़ी ताकत

इंजीनियर्स डे पर पीएम मोदी ने इंजीनियरों को कर्मयोगी बताया और विश्वेश्वरैया को नमन किया, देश निर्माण में उनकी रचनात्मक शक्ति और योगदान को सराहा।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रधानमंत्री मोदी इंजीनियर्स के साथ मेट्रो में

नई दिल्ली, दिल्ली। इंजीनियर्स डे के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के इंजीनियरों को शुभकामनाएं दीं और महान इंजीनियर तथा राजनेता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि दी। मोदी ने इंजीनियरों को कर्मयोगी बताते हुए कहा कि वे निर्माण, नवाचार और समाधान के जरिए बेहतर भविष्य तैयार करते हैं। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इंजीनियरों की रचनात्मक क्षमता और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के इंजीनियर विचारों और आकांक्षाओं को ठोस उपलब्धियों में बदलने का काम करते हैं और अपनी प्रतिभा से भारत की पहचान मजबूत कर रहे हैं।  [1]

कर्मयोगी इंजीनियर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंजीनियर सिर्फ मशीनें बनाने तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे सपनों और विचारों को हकीकत में बदलने वाले कर्मयोगी हैं। उन्होंने भारतीय इंजीनियरों की उस क्षमता की सराहना की जिसके दम पर मुश्किल और असंभव लगने वाले काम भी संभव हुए हैं। इंजीनियर्स डे पर मोदी का संदेश तकनीकी काम से आगे बढ़कर इंजीनियरों की सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी पर भी केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के इंजीनियर बेहतर कल के लिए निर्माण करते हैं, नए प्रयोग करते हैं और समस्याओं के समाधान खोजते हैं। उन्होंने हर भारतीय इंजीनियर की रचनात्मक शक्ति को सम्मान दिया।

मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भारत में ऐसे कई इंजीनियर हुए हैं जिन्होंने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके काम ने देश की विकास यात्रा को गति देने के साथ इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई है। प्रधानमंत्री ने इंजीनियरों की उपलब्धियों को केवल तकनीकी सफलता के रूप में नहीं देखा बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण से जोड़कर पेश किया। उन्होंने कहा कि इंजीनियर विचारों और आकांक्षाओं को ठोस उपलब्धियों में बदलते हैं। इस संदेश में युवा इंजीनियरों के लिए भी प्रेरणा का संकेत है कि उनकी रचनात्मक क्षमता देश के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

विश्वेश्वरैया की विरासत

इंजीनियर्स डे हर साल 15 सितंबर को सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। उनका जन्म 15 सितंबर 1861 को हुआ था और उन्हें भारत के प्रमुख सिविल इंजीनियरों तथा राष्ट्रनिर्माताओं में गिना जाता है। विश्वेश्वरैया ने देश के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और इंजीनियरिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें आधुनिक मैसूर के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले व्यक्तित्व के तौर पर भी याद किया जाता है। उनके असाधारण योगदान के सम्मान में उन्हें 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनकी इंजीनियरिंग प्रतिभा और राष्ट्र निर्माण की सोच आज भी देश के इंजीनियरों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।

विश्वेश्वरैया की विरासत में कृष्णा राजा सागर बांध के निर्माण और जटिल बाढ़ सुरक्षा प्रणालियों से जुड़े महत्वपूर्ण काम शामिल हैं। सरकार ने उनके असाधारण योगदान को सम्मान देते हुए 1968 में 15 सितंबर को राष्ट्रीय इंजीनियर्स डे के रूप में मनाने की शुरुआत की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी उपलब्धियों को भारत की गौरवशाली इंजीनियरिंग परंपरा का हिस्सा बताते हुए याद किया। इंजीनियर्स डे पर उनका संदेश केवल एक महान इंजीनियर को श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं रहा बल्कि देश के मौजूदा इंजीनियरों की क्षमता और जिम्मेदारी को भी सामने लाया। मोदी ने इंजीनियरों की रचनात्मक शक्ति को राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण ताकत के रूप में सलाम किया।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश और सर एम विश्वेश्वरैया से संबंधित ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध समाचार स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत की गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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