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सर्कुलर इकोनॉमी फोरम: जुटेंगे 65 देशों के प्रतिनिधि, भारत की बड़ी पहल

सर्कुलर इकोनॉमी फोरम आज से भारत में पहली बार शुरू हो रहा है। 65 से ज्यादा देशों के 2,000 से अधिक प्रतिनिधि जुटेंगे और संसाधनों के नए मॉडल पर चर्चा करेंगे।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

गांधीनगर, गुजरात। सर्कुलर इकोनॉमी पर दुनिया का बड़ा मंच आज से भारत में पहली बार शुरू हो रहा है। विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026 का आयोजन गांधीनगर के महात्मा मंदिर में 15 से 18 सितंबर तक होगा। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस आयोजन का मकसद भारत की सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़ी पहलों को दुनिया के सामने रखना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना है। कार्यक्रम की शुरुआत केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल संयुक्त रूप से करेंगे। यह आयोजन दक्षिण एशिया में पहली बार हो रहा है और इसे भारत के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है।  [1]

भारत का मॉडल

इस साल फोरम की थीम सर्कुलर इकोनॉमी ट्रांजिशन फॉर पीपल एंड प्रॉस्पेरिटी रखी गई है। इसमें दुनिया के अलग अलग देशों से सरकार, कारोबार, विशेषज्ञ और नवाचार से जुड़े लोग हिस्सा लेंगे। सरकारी जानकारी के मुताबिक 65 से ज्यादा देशों के 2,000 से अधिक हितधारकों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजन में संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल, मरम्मत, नवीनीकरण और पुनर्चक्रण जैसे तरीकों पर चर्चा होगी। मकसद यह है कि इस्तेमाल के बाद बेकार समझी जाने वाली चीजों को फिर से आर्थिक संसाधन बनाया जाए और विकास के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को भी कम किया जा सके।

फोरम में वित्त, उद्योग, हरित ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शासन और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में सर्कुलर इकोनॉमी के इस्तेमाल पर भी चर्चा होगी। मुख्य कार्यक्रम के दौरान कई पूर्ण सत्र और विषय आधारित सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा प्रदर्शनी में कंपनियां और संस्थान ऐसे समाधान दिखाएंगे जो संसाधनों की बर्बादी कम करने और चीजों को लंबे समय तक उपयोग में रखने में मदद कर सकते हैं। भारत इस मंच का इस्तेमाल अपनी नीतियों और जमीनी प्रयासों को सामने रखने के साथ दूसरे देशों के अनुभव समझने के लिए भी करेगा। इससे कारोबार और सरकारों के बीच नए सहयोग की राह खुल सकती है।

दक्षिण एशिया में पहली बार

विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम की मेजबानी पहली बार दक्षिण एशिया कर रहा है और भारत के लिए यह आयोजन इसी वजह से खास है। फोरम का मुख्य कार्यक्रम 15 और 16 सितंबर को होगा, जबकि 17 और 18 सितंबर को एक्सेलेरेटर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में अलग अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ ऐसे व्यावहारिक उपायों पर बात करेंगे जिनसे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सके। आयोजन का उद्देश्य केवल चर्चा तक सीमित नहीं है बल्कि ऐसे समाधान सामने लाना भी है जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके। भारत इस वैश्विक मंच के जरिए टिकाऊ विकास और संसाधन दक्षता पर अपनी सोच साझा करेगा।

सर्कुलर इकोनॉमी का सीधा मतलब ऐसी आर्थिक व्यवस्था से है जिसमें सामान इस्तेमाल होने के बाद उसे फेंकने के बजाय दोबारा उपयोग, मरम्मत, नवीनीकरण या पुनर्चक्रण के जरिए अर्थव्यवस्था में वापस लाया जाता है। इससे कच्चे संसाधनों की जरूरत घटाने, कचरा कम करने और नए कारोबारी अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है। भारत में इस सोच को बढ़ावा देने के लिए कई क्षेत्रों में प्रयास किए जा रहे हैं। गांधीनगर में होने वाला यह वैश्विक आयोजन उन्हीं प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय मंच देगा और सर्कुलर इकोनॉमी को लोगों की समृद्धि और टिकाऊ विकास से जोड़ने की दिशा में नई चर्चा शुरू करेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। आयोजन से जुड़े कार्यक्रम, भागीदारी और अन्य विवरण उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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