नकली कैंसर दवाओं का मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। 90 से ज्यादा अस्पतालों तक संदिग्ध दवाएं और आईसीयू में इंजेक्शन पहुंचने की बात सामने आई है।
प्रतीकात्मक फोटो
बेंगलुरु, कर्नाटक। नकली कैंसर दवाओं की सप्लाई से जुड़े मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था में चिंता बढ़ा दी है। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध नकली कैंसर दवाएं और आईसीयू में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन बेंगलुरु के 90 से अधिक अस्पतालों तक पहुंचने की आशंका है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी को आगे की जिम्मेदारी दी गई है। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और अन्य एजेंसियों से मदद मांगी है। जांच अब यह पता लगाने पर केंद्रित है कि संदिग्ध दवाओं की आपूर्ति किस नेटवर्क के जरिए हुई और अस्पतालों तक इनकी पहुंच कैसे बनी। [1]
नकली कैंसर दवाओं की जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल सप्लाई नेटवर्क का है। अधिकारियों को यह पता लगाना होगा कि संदिग्ध दवाएं कहां तैयार हुईं, किस माध्यम से वितरित की गईं और किन अस्पतालों या चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचीं। 90 से अधिक अस्पतालों तक संभावित सप्लाई की जानकारी ने मामले को स्थानीय स्तर से बड़ा बना दिया है। यदि जांच में बड़े नेटवर्क की पुष्टि होती है तो दवा वितरण प्रणाली की निगरानी पर भी सवाल उठ सकते हैं। एसआईटी अब संभावित आपूर्ति श्रृंखला की अलग अलग कड़ियों की जांच करेगी। केंद्रीय एजेंसियों की मदद से दवाओं के स्रोत और गुणवत्ता की जांच को आगे बढ़ाया जा सकता है।
नकली कैंसर दवाओं का मामला इसलिए बेहद संवेदनशील है क्योंकि कैंसर उपचार में दवा की गुणवत्ता और सही मात्रा सीधे मरीज के इलाज से जुड़ी होती है। संदिग्ध दवाओं के अस्पतालों तक पहुंचने की खबर के बाद मरीजों और परिजनों के बीच चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने मरीजों को ऐसी दवाएं दी गईं और उनके स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव पड़ा या नहीं। जांच एजेंसियों को दवाओं के बैच, वितरण रिकॉर्ड और अस्पतालों के स्टॉक की जानकारी मिलानी होगी। इसके साथ यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि संदिग्ध दवाओं की पहचान किस स्तर पर हुई और आगे उनकी आपूर्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नकली कैंसर दवाओं की जांच में राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से सहयोग मांगा है ताकि संभावित सप्लाई चेन का विस्तार से पता लगाया जा सके। दवा नियामक संस्थाओं के पास नमूनों की जांच, बैच की पुष्टि और लाइसेंस संबंधी रिकॉर्ड खंगालने की क्षमता होती है। यदि संदिग्ध दवाओं की सप्लाई कई जिलों या राज्यों तक फैली मिली तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल एसआईटी के सामने मुख्य चुनौती नेटवर्क की पूरी संरचना सामने लाना और संभावित जोखिम वाली दवाओं को बाजार से अलग करना है।
नकली कैंसर दवाओं के मामले में अब एसआईटी व्यापक सप्लाई नेटवर्क की जांच करेगी। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, संदिग्ध दवाएं और आईसीयू इंजेक्शन 90 से ज्यादा बेंगलुरु अस्पतालों तक पहुंचने की आशंका है और अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इनकी आपूर्ति किस रास्ते से हुई। अभी मरीजों पर प्रभाव या पूरे नेटवर्क की अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है। इसलिए किसी अस्पताल या व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले आधिकारिक जांच पूरी होना जरूरी है। आगे दवाओं के नमूनों, वितरण रिकॉर्ड और आपूर्ति श्रृंखला की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल नकली कैंसर दवाओं का मामला स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर जांच विषय बना हुआ है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नकली कैंसर दवाओं की सप्लाई और मरीजों पर संभावित प्रभाव से जुड़े सभी तथ्य जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम रूप से स्पष्ट होंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।