विश्व आर्थिक मंच द्वारा जारी ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में भारत का स्थान एक सौ इकतीसवें नंबर पर बरकरार है। लैंगिक समानता की दिशा में कुल प्रगति 64.5 प्रतिशत।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली। विश्व स्तर पर लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति का आकलन करने वाली महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आ चुकी है। ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा जारी ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में भारत ने अपना 131वां स्थान बरकरार रखा है, हालांकि देश के समग्र स्कोर में हल्का सुधार जरूर दर्ज किया गया है। कुल 145 देशों को शामिल करने वाले इस ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में आइसलैंड, फिनलैंड और नॉर्वे ने क्रमशः अपने शीर्ष तीन स्थान बनाए रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में लैंगिक समानता की दिशा में कुल प्रगति 64.5 प्रतिशत तक पहुँची है, जो वैश्विक औसत से अभी भी कम है। [1]
इस ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स के विभिन्न उप-पैमानों का विश्लेषण करें तो भारत का सबसे बेहतर प्रदर्शन 'राजनीतिक सशक्तिकरण' (Political Empowerment) के क्षेत्र में रहा है, जहाँ देश को वैश्विक स्तर पर 67वां स्थान प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, 'स्वास्थ्य और उत्तरजीविता' (Health and Survival) श्रेणी में भी भारत ने अपने स्कोर में सुधार करते हुए 95.6 प्रतिशत समानता हासिल की है। वहीं, शैक्षिक प्राप्ति के मामले में भी देश की स्थिति मजबूत रही है, हालांकि आर्थिक भागीदारी और अवसर के मोर्चे पर दक्षिण एशिया क्षेत्र में अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पेशेवर और तकनीकी कार्यकर्ताओं की श्रेणी में पिछले दो दशकों के दौरान उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन कॉर्पोरेट और नेतृत्व के स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को और बढ़ाने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि देश में महिला श्रम-बल की भागीदारी में मामूली सुधार देखा गया है, जिसे गति देने के लिए नीतिगत स्तर पर लगातार ठोस प्रयास जारी रखने की जरूरत है।
विश्व आर्थिक मंच की इस रिपोर्ट के वैश्विक निष्कर्षों के मुताबिक, दुनिया भर के कई देशों ने इस ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स के तहत लैंगिक अंतराल को पाटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सूचकांक में शीर्ष दस देशों में नामीबिया, यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और आयरलैंड जैसे देश शामिल हैं, जिन्होंने महिला नेतृत्व और समावेशन के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य किया है। दूसरी ओर, सूचकांक के सबसे निचले पायदान पर रहने वाले देशों में चाड, ईरान और पाकिस्तान जैसे राष्ट्र शामिल हैं।
संस्थान की प्रबंध निदेशक सादिया जाहिदी ने कहा कि पिछले बीस वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि लैंगिक समानता हासिल करना संभव है और इसके लिए संसाधनों की कमी नहीं बल्कि सही नीतियों को तेजी से लागू करने की आवश्यकता है। भारत के संदर्भ में, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर महिलाओं की अधिक सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने से आने वाले वर्षों में ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स की इस रैंकिंग में और अधिक सुधार देखने को मिल सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। वैश्विक सूचकांकों और सामाजिक नीतियों से जुड़े इस मामले में समय और परिस्थितियों के अनुसार नए तथ्य सामने आ सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।