बाज़ार और निवेश

तीन साल में पहली बार बड़ा फैसला सामने आया, ब्याज दर में तेजी आई

लगातार बढ़ती महंगाई के बीच केंद्रीय बैंक ने लिया बड़ा ऐतिहासिक फैसला, ब्याज दर में तेजी से आम आदमी की जेब पर बढ़ा भारी असर, जानिए पूरी रिपोर्ट।

By अजय त्यागी 1 min read
Twitter Facebook WhatsApp

प्रतीकात्मक फोटो

वाशिंगटन, अमेरिका। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने देश में लगातार बढ़ती महंगाई पर लगाम कसने के उद्देश्य से ब्याज दरों में बड़ा इजाफा करने का फैसला लिया है। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, लगातार बनी हुई उच्च महंगाई और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच फेड रिजर्व ने तीन साल में पहली बार बेंचमार्क ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद नई ब्याज दरें 3.75 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गई हैं। केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम के चलते अमेरिकी उपभोक्ताओं और वित्तीय बाजारों के लिए सभी प्रकार का कर्ज लेना काफी महंगा हो गया है, जिसके कारण ब्याज दर में तेजी का असर अब न केवल स्थानीय बाजार पर बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।  [1]

फेड बैंक का कदम

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के सभी 12 सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस ब्याज दर बढ़ोतरी के पक्ष में अपना समर्थन दिया है। केंद्रीय बैंक के शीर्ष अधिकारियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि महंगाई अभी भी उनके तय मानक लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है, जिसे सामान्य स्तर पर लाने के लिए ऐसा सख्त कदम उठाना अत्यंत अनिवार्य हो चुका था। बैंक प्रबंधन का ऐसा विश्वास है कि वर्तमान में देश की आर्थिक स्थिति इतनी सुदृढ़ है कि वह इस बदलाव को आसानी से सहन कर सकती है। आने वाले महीनों में आर्थिक आंकड़ों की गहन समीक्षा की जाएगी।

इस नीतिगत बदलाव का सीधा प्रभाव अब आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी और वित्तीय प्राथमिकताओं पर पड़ने लगा है। देश भर के बैंकों द्वारा कर्ज महंगा किए जाने से होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की मासिक किस्तें अचानक काफी अधिक बढ़ गई हैं। इसके परिणामस्वरूप मध्यम वर्गीय परिवारों के घरेलू बजट संतुलन में भारी व्यवधान उत्पन्न हुआ है। वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञ ऐसा मान रहे हैं कि वर्तमान परिस्थितियों में ब्याज दर में तेजी का यह रुख आने वाले समय में वित्तीय बाजारों में अस्थिरता को बढ़ा सकता है और आम लोगों को अपनी प्राथमिकताओं में फेरबदल करना पड़ सकता है।

बाजार पर असर

केंद्रीय बैंक के इस ऐतिहासिक फैसले के तत्काल बाद अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। सरकारी ट्रेजरी बॉंड्स पर मिलने वाले रिटर्न में अचानक उछाल देखा गया है, जिसने निवेशकों को आकर्षित किया है। बाजार के विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि आने वाली तिमाहियों में भी महंगाई के आंकड़े उच्च स्तर पर बने रहते हैं, तो केंद्रीय बैंक इस वर्ष के अंत से पहले दरों में एक और वृद्धि करने पर गंभीरता से विचार कर सकता है, जिससे वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल और गहरा गया है।

दूसरी ओर, फेडरल रिजर्व के इस कड़े फैसले का राजनीतिक स्तर पर भी तीखा विरोध शुरू हो गया है। व्हाइट हाउस और कई वरिष्ठ सांसदों ने इस वृद्धि को जनविरोधी बताते हुए अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि जब आम जनता और छोटे कारोबारी पहले से ही उच्च लागत से जूझ रहे हैं, तब ब्याज दर में तेजी लाना अर्थव्यवस्था की रिकवरी को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, फेडरल रिजर्व ने स्पष्ट किया है कि उसकी पहली प्राथमिकता महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण पाना है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। वैश्विक आर्थिक नीतियों और ब्याज दरों में बदलाव से जुड़े वित्तीय जोखिमों के लिए पाठकों को स्वविवेक का उपयोग करना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

#USFed #InterestRate #Inflation #GlobalEconomy #FederalReserve #FinancialNews
Read Full Article on RexTV India