भारत के विदेश मंत्रालय ने चीन और पाकिस्तान के बीच भारतीय क्षेत्रों को लेकर होने वाले किसी भी तथाकथित सीमा सहयोग को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है।
भारत चीन वार्ता - फाइल फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। भारत सरकार ने चीन और पाकिस्तान के बीच भारतीय क्षेत्रों को लेकर बनने वाले किसी भी तथाकथित सीमा आयोग और समझौते को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस तरह के समझौतों का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह पूरी तरह से अवैध है। भारत ने यह कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों देशों को साफ संदेश दिया है कि भारतीय संप्रभुता के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह कदम पूरी तरह से अनपेक्षित है। [1]
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया है कि पाकिस्तान और चीन के बीच इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार का सहयोग पूरी तरह से खारिज किए जाने योग्य है क्योंकि इसका कोई कानूनी वजूद नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने हमेशा से अपनी क्षेत्रीय अखंडता को सर्वोपरि रखा है और किसी भी दूसरे देश को भारतीय भूभाग पर अधिकार जमाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इस कड़े बयान के सामने आने के बाद से अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में हलचल बहुत ज्यादा तेज हो गई है और सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं।
सरकार का यह भी मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियां क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को खतरे में डालने का काम करती हैं जिन्हें कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों द्वारा की जाने वाली ऐसी साजिशों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत पूरी तरह से सक्षम और तैयार है। देश के कूटनीतिक जानकारों का ऐसा कहना है कि इस प्रकार के बयानों से यह साफ हो जाता है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है और कूटनीतिक मोर्चे पर कोई समझौता नहीं होगा।
भारतीय रणनीतिकारों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान मिलकर भारत के खिलाफ लगातार इस तरह की कूटनीतिक चालें चलते रहते हैं जिनका माकूल जवाब देना बेहद जरूरी है। देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को ताक पर रखकर किए जाने वाले ऐसे किसी भी समझौते का विरोध करना भारत सरकार की प्राथमिकता रही है। आम नागरिकों के बीच भी इस कड़े रुख को लेकर काफी समर्थन देखा जा रहा है और लोग देश की संप्रभुता के समर्थन में पूरी मजबूती के साथ खड़े नजर आ रहे हैं ताकि पड़ोसी देशों की हर चाल को नाकाम किया जा सके।
विदेश मंत्रालय के इस ऐतिहासिक और कड़े कदम से यह स्पष्ट संदेश चला गया है कि भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सतर्क और गंभीर है। भविष्य में भी यदि इस तरह के किसी भी तथाकथित समझौते का प्रयास किया गया तो भारत इसी प्रकार कड़ा और निर्णायक रुख अपनाएगा। देश की जनता और कूटनीतिक विश्लेषक सरकार के इस फैसले की सराहना कर रहे हैं क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति और अधिक मजबूत हुई है और देश का मान-सम्मान लगातार बढ़ रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। विदेश नीति और कूटनीतिक मामलों से जुड़े मामलों के लिए पाठकों को आधिकारिक स्रोतों की जानकारी का उपयोग करना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।