जोधपुर नगर निगम के चुनाव परिणामों में दोनों प्रमुख दलों के बीच कांटे की टक्कर और पार्षदों के गायब होने से राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है।
प्रतीकात्मक फोटो
जोधपुर, राजस्थान। जोधपुर नगर निगम के चुनाव परिणामों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद शहर में भारी राजनीतिक घमासान मच गया है और इसकी विस्तृत जानकारी अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार सामने आई है। चुनाव के दौरान दोनों प्रमुख दलों ने बराबर सीटें हासिल की हैं जिससे स्थिति काफी पेचीदा हो गई है। बोर्ड के गठन और मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए अब 7 अन्य सदस्यों के समर्थन की सख्त जरूरत आन पड़ी है। परिणाम आने के तुरंत बाद एक बागी पार्षद और उनकी पोती के अचानक गायब होने से सनसनी फैल गई है। इस रहस्यमयी घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और विपक्षी दलों ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। [1]
जीत का आंकड़ा छूने के लिए सभी राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं और जोड़तोड़ की राजनीति जोरों पर चल रही है। शहर के राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा आम हो चुकी है कि किसी भी समय पाला बदला जा सकता है। निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों को अपने पाले में सुरक्षित रखने के लिए गोपनीय बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
परिणामों के बाद से ही शहर के विभिन्न इलाकों में पुलिस और प्रशासनिक अमला पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है। राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता अपनी रणनीतियों को अमलीजामा पहनाने में जुटे हैं ताकि अंतिम समय में किसी भी तरह के धोखे से बचा जा सके। हर एक कैंप की नजर विरोधी खेमे की हर गतिविधि पर टिकी हुई है।
लापता हुई बागी पार्षद और उनकी पोती का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाने के कारण असमंजस की स्थिति और अधिक गहरी होती जा रही है। परिजनों ने विपक्षी दल के नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें जबरन बंधक बनाए जाने की आशंका व्यक्त की है। इस घटना ने पूरे चुनाव प्रक्रिया को एक नया और सनसनीखेज मोड़ दे दिया है।
पुलिस प्रशासन लापता लोगों की तलाश में जुटा हुआ है और विभिन्न ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। इस हाईप्रोफाइल ड्रामे के चलते राजनीतिक घमासान के साथ साथ आम जनता के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। स्थानीय लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर इतनी सुरक्षा के बीच इस तरह की घटनाएं कैसे संभव हो पा रही हैं।
बचे हुए 7 सदस्यों का समर्थन हासिल करने के लिए दोनों तरफ से पानी की तरह पैसा बहाने और बड़े वादे करने की खबरें सामने आ रही हैं। जो दल इन निर्दलीय और अन्य विजयी पार्षदों को साधने में सफल होगा, उसी के सिर पर मेयर का ताज सजेगा। यही कारण है कि पर्दे के पीछे से मोलभाव का खेल अपने चरम पर पहुंच चुका है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन जोधपुर की राजनीति के लिए बेहद उथल-पुथल भरे साबित होने वाले हैं। सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेने के लिए यह राजनीतिक घमासान तब तक शांत नहीं होगा जब तक कि नगर निगम का नया बोर्ड आधिकारिक रूप से अस्तित्व में नहीं आ जाता।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। जोधपुर नगर निगम चुनावों और राजनीतिक उठापटक से जुड़े इस मामले में समय और परिस्थितियों के अनुसार नए तथ्य सामने आ सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।