शिशु आहार उत्पादों में भ्रामक दावों और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर FSSAI की कार्रवाई ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ कड़ा शिकंजा कसा है।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, भारत। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने मशहूर बहुराष्ट्रीय कंपनी नेस्ले इंडिया के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। नियामक संस्था ने नेस्ले के लोकप्रिय शिशु पोषण उत्पादों जैसे नैन एक्सेला प्रो और लैक्टोजेन प्रो पर गंभीर सवाल उठाते हुए उनके विज्ञापनों और दावों पर कड़ी आपत्ति जताई है। FSSAI की जांच में यह बात सामने आई है कि कंपनी द्वारा इन उत्पादों के संबंध में जो दावे किए जा रहे थे, वे विधिक और गुणवत्ता मानकों की कसौटी पर पूरी तरह खरे नहीं उतरते हैं। FSSAI की कार्रवाई में इन उत्पादों के दावों को भ्रामक मानते हुए कंपनी को तत्काल प्रभाव से सुधार करने और नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। [1]
FSSAI की कार्रवाई मुख्य रूप से उन विज्ञापनों और लेबलिंग दावों पर केंद्रित है जिनमें शिशु आहार उत्पादों के पोषण संबंधी फायदों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। FSSAI का कड़ा रुख इस बात का प्रतीक है कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रामक प्रचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि शिशुओं के शुरुआती विकास के महीनों में उनके आहार की गुणवत्ता सीधे तौर पर उनके भविष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, इसलिए इसमें पूरी पारदर्शिता आवश्यक है। कंपनी को नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके द्वारा प्रचारित किए जा रहे वैज्ञानिक दावे किन मानकों के आधार पर प्रमाणित हैं।
इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद से बाजार में हड़कंप मच गया है और उपभोक्ता अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठन भी पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। माता-पिता अक्सर इन ब्रांडेड उत्पादों पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं, लेकिन इस तरह के खुलासों से खाद्य सुरक्षा और विज्ञापनों की सत्यता पर बड़े सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। FSSAI ने अपने दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसी भी उत्पाद के प्रचार में उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाली शब्दावली का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। नियामक संस्था द्वारा उठाए गए इन कदमों से खाद्य उद्योग जगत में एक सख्त संदेश गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी पेनल्टी लगाई जा सकती है।
FSSAI ने नेस्ले इंडिया को यह भी चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर विज्ञापनों में आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो उनके खिलाफ और अधिक गंभीर कानूनी कदम उठाए जाएंगे। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बच्चों के आहार से जुड़े मामलों में लाइसेंस रद्द करने या भारी आर्थिक जुर्माना लगाने तक के प्रावधान मौजूद हैं। कंपनी के प्रवक्ता ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वे नियामक के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं और दिशानिर्देशों के अनुरूप अपने दावों की समीक्षा कर रहे हैं। हालांकि, इस प्रशासनिक दबाव के बाद से कंपनी की साख और बाजार में उसकी स्थिति पर थोड़ा बहुत असर पड़ना तय माना जा रहा है।
देश भर के बाल रोग विशेषज्ञों और स्वास्थ्य संगठनों ने FSSAI की कार्रवाई के इस कदम की भरपूर सराहना की है क्योंकि इससे नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा पुख्ता होती है। बाजार में बिकने वाले अन्य शिशु आहार ब्रांड्स के लिए भी यह एक बड़ी चेतावनी है कि वे अपनी पैकेजिंग और विज्ञापनों में पूरी तरह तथ्यात्मक और पारदर्शी रहें। आने वाले दिनों में नियामक संस्था द्वारा देश भर की अन्य खाद्य कंपनियों के उत्पादों की भी कड़ी जांच किए जाने की पूरी संभावना है ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके। इस प्रकार की सख्त पहलों से यह सुनिश्चित होता है कि खाद्य और पोषण बाजार में जवाबदेही का स्तर हमेशा ऊंचा बना रहे।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट में दी गई FSSAI की कार्रवाई और कॉर्पोरेट विवरणों को पाठकों की सामान्य जानकारी के लिए प्रस्तुत किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए FSSAI की कार्रवाई से जुड़े किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।