बीकानेर में 19 सितंबर 2026 को महर्षि दधीचि जयंती के अवसर पर देहदानियों के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा और मानव सेवा के आदर्शों का स्मरण किया जाएगा।
महर्षि दधीचि - प्रतीकात्मक फोटो
बीकानेर, राजस्थान। भारतीय सनातन परंपरा में महर्षि दधीचि का नाम त्याग, तपस्या, परोपकार और मानव कल्याण के अद्वितीय प्रतीक के रूप में लिया जाता है। लोककल्याण के लिए अपने जीवन तक का त्याग करने वाले महर्षि दधीचि का जीवन आज भी समाज को निःस्वार्थ सेवा और मानवता के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। इन्हीं महान आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने और देहदान के माध्यम से मानव सेवा की प्रेरणा को सम्मानित करने के उद्देश्य से सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर में महर्षि दधीचि जयंती समारोह-2026 के तहत पुष्पांजलि एवं देहदानियों के परिजनों का सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम 19 सितंबर 2026, शनिवार को प्रातः 11 बजे मेडिकल कॉलेज के सभागार में होगा। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस गरिमामयी आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
एनाटॉमी विभाग, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के आयोजन एवं अखिल भारतीय दाधीच फाउंडेशन, बीकानेर की निरंतर सहभागिता से आयोजित होने वाले इस समारोह में शिवमठ शिवबाड़ी, बीकानेर के महंत स्वामी विमर्शानंद गिरी महाराज प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र कुमार तथा पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया अतिथि के रूप में समारोह में शामिल होंगे। कार्यक्रम में एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश मणि, अखिल भारतीय दाधीच फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार दाधीच सहित मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागाध्यक्ष, चिकित्सक, प्रबुद्धजन, देहदानियों के परिजन तथा देहदान के लिए प्रेरित करने वाली संस्थाओं के पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।
इस भव्य समारोह के दौरान सभी गणमान्य अतिथि अपने विचार साझा करेंगे और समाज में इस महान परंपरा को आगे बढ़ाने वाले लोगों का उत्साहवर्धन करेंगे। चिकित्सा जगत से जुड़े इन वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति यह साबित करती है कि स्वास्थ्य क्षेत्र और सामाजिक संस्थाएं मिलकर किस प्रकार समाज हित में एक मजबूत और सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी समितियों ने अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभाना शुरू कर दिया है। यह आयोजन समाज में देहदान के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करने और लोगों को जागरूक करने का एक बहुत बड़ा और सराहनीय माध्यम है। आज के समय में चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्यों के लिए मानव शरीर या अंगों की बहुत आवश्यकता होती है, जिसे पूरा करने में देहदानियों का यह त्याग अमूल्य योगदान देता है। इस तरह के आयोजनों से आम जनता का रुझान इस नेक कार्य की तरफ तेजी से बढ़ता है और लोग स्वप्रेरणा से आगे आते हैं।
महर्षि दधीचि का जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पण का संदेश देता है। महर्षि दधीचि जयंती केवल धार्मिक या सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, परोपकार और मानव कल्याण के उन मूल्यों को स्मरण करने का अवसर है, जो समाज को बेहतर दिशा देते हैं। देहदान भी इसी निःस्वार्थ भावना का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन के बाद भी चिकित्सा शिक्षा और मानव सेवा में योगदान देता है। एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश मणि एवं अखिल भारतीय दाधीच फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार दाधीच ने बताया कि मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले महर्षि दधीचि जयंती कार्यक्रम की निरंतर श्रृंखला के तहत इस वर्ष भी समारोह आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में देहदानियों के परिजनों का सम्मान कर उनके त्याग और मानव सेवा में योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाएगी।
इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी को हमारे महान पौराणिक इतिहास और त्याग की संस्कृति से जुड़ने का सुनहरा अवसर मिलता है। बीकानेर के इस मेडिकल कॉलेज में होने वाला यह कार्यक्रम पूरे राज्य के लिए एक मिसाल बन चुका है जहाँ हर साल लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। अंत में सभी उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए इस बात पर जोर दिया जाएगा कि मानवता की सेवा से बड़ा इस दुनिया में कोई दूसरा धर्म नहीं हो सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट में दी गई महर्षि दधीचि जयंती और सम्मान समारोह से संबंधित समस्त जानकारियों को पाठकों की सामान्य जानकारी के लिए प्रस्तुत किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।