खुदरा बाजारों में ₹50 के पार पहुंचे प्याज के दाम ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। जानिए क्यों बाजार में लगातार बनी हुई है महंगाई और कब मिलेगी राहत।
प्रतीकात्मक फोटो
खुदरा बाजारों में प्याज के दाम इन दिनों लगातार आसमान छू रहे हैं, जिससे देश भर के आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह से चरमरा गया है। पिछले कुछ हफ्तों से जरूरी सब्जियों की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, और सामान्य उपभोक्ताओं को अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, मुख्य रबी फसल के उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके परिणामस्वरूप बाजार में गंभीर आपूर्ति संकट पैदा हुआ है। सरकार की तरफ से बफर स्टॉक का उपयोग करके रियायती दरों पर प्याज बेचने के प्रयास लगातार जारी हैं। [1]
कृषि बाजार के प्रमुख विश्लेषकों का यह मानना है कि इस बार मौसमी मार और देश के विभिन्न हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश ने मुख्य उत्पादक राज्यों में फसलों को अपूरणीय नुकसान पहुंचाया है। मार्च और अप्रैल के दौरान महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के प्रमुख उत्पादक इलाकों में हुई अचानक बारिश के कारण पिछड़ी रबी फसल की गुणवत्ता पर बहुत बुरा असर पड़ा था।
इसके अलावा, जुलाई और अगस्त के महीनों में हुई अत्यधिक और लंबी बारिश की वजह से स्थानीय गोदामों में रखे गए प्याज में सड़न व फंगस की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है, जिससे मंडियों में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की कुल आवक घट गई है।
बढ़ती हुई कीमतों पर प्रभावी ढंग से लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने नेफेड जैसी एजेंसियों के माध्यम से देश भर में रियायती दरों पर खुदरा बिक्री की व्यवस्था शुरू की है। सरकार अपने मूल्य स्थिरीकरण बफर के जरिए देश भर की चुनिंदा प्रमुख मंडियों और खुदरा बिक्री केंद्रों पर प्याज की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है ताकि बढ़ती कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।
हालांकि, थोक बाजारों में कीमतों में आंशिक नरमी जरूर देखने को मिली है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि जब तक बाजार में नई खरीफ फसल की फ्रेश आवक बड़े पैमाने पर शुरू नहीं होती, तब तक प्याज के दाम में राहत मिलना असंभव है। बाजार विश्लेषकों का आकलन है कि सितंबर और अक्टूबर के दौरान मंडियों में प्याज की उपलब्धता सीमित रह सकती है, और नया खरीफ उत्पादन आने तक कीमतों का यह ऊंचा स्तर बना रहेगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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