राजस्थान

देशभर के विशेषज्ञों की मौजूदगी में संपन्न हुआ राष्ट्रीय भूगोल सम्मेलन

राजस्थान के कोटा विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय भूगोल सम्मेलन का भव्य समापन हुआ, जिसमें विकसित भारत 2047 के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किए गए

By अजय त्यागी 1 min read
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भूगोल सम्मेलन में वक्ताओं का संबोधन

कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। राजस्थान भूगोल परिषद के बावनवें राष्ट्रीय सम्मेलन का शनिवार को कोटा विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में बहुत ही शानदार तरीके से समापन हुआ। कुलगुरु प्रो बी पी सारस्वत के निर्देशन में सत्रह से उन्नीस सितंबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय भूगोल सम्मेलन का केंद्रीय विषय विकसित भारत 2047: विकसित भारत का ब्लूप्रिंट—एक भौगोलिक दृष्टिकोण रहा। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न दूर-दराज के क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित भूगोलवेत्ताओं, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विषय विशेषज्ञों ने विकसित भारत के निर्माण में भौगोलिक दृष्टिकोण, सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय विकास की भूमिका पर बहुत ही गहराई से विचार-विमर्श किया तथा अपने अनुभव साझा किए।

तकनीकी सत्र

अंतिम दिन आयोजित किए गए तीन महत्वपूर्ण तकनीकी सत्रों में कुल चौवन शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें राजस्थान के विभिन्न जिलों से जुड़े भौगोलिक विषयों पर किए गए शोध कार्यों के साथ-साथ पर्यावरण, भूजल में बढ़ती फ्लोराइड की मात्रा, सतत विकास, संसाधन प्रबंधन, जनसंख्या, क्षेत्रीय विकास तथा समकालीन भौगोलिक चुनौतियों से जुड़े अध्ययन विशेष रूप से शामिल रहे। देश भर से आए शोधार्थियों और विषय विशेषज्ञों ने अपने शोध निष्कर्षों को साझा किया तथा विभिन्न विषयों पर एक बहुत ही सार्थक अकादमिक संवाद हुआ। इस भूगोल सम्मेलन के माध्यम से युवाओं को शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एक बहुत ही बेहतरीन और मजबूत मंच प्राप्त हुआ।

नई कार्यकारिणी

सम्मेलन के दौरान राजस्थान भूगोल परिषद की एक सामान्य सभा भी आयोजित की गई, जिसमें परिषद के अकादमिक एवं संगठनात्मक विषयों पर चर्चा के साथ वार्षिक आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। परिषद के आजीवन सदस्यों ने आगामी सत्र के लिए नई कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से चयन किया। अध्यक्ष पद पर प्रो जय भारत सिंह, प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कालाडेरा तथा उपाध्यक्ष पद पर प्रो उम्मेद कुमार चौधरी और डॉ सबीहा खान का चयन किया गया। सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने परिषद को और अधिक मजबूत बनाने तथा अकादमिक गतिविधियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया, जिससे पूरे प्रदेश के भूगोल छात्रों में काफी उत्साह देखा गया।

भौगोलिक विविधता

मुख्य अतिथि जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रो पी के शर्मा ने सम्मेलन के विषय और भौगोलिक अध्ययन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अरावली से चंबल और थार मरुस्थल तक फैली राजस्थान की भौगोलिक विविधताओं की चर्चा करते हुए प्रदेश के विभिन्न भौगोलिक आयामों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान का भौगोलिक स्वरूप अत्यंत विविधतापूर्ण है और इसके प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट प्राकृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक विशेषताएं हैं। ऐसे में प्रदेश के समग्र विकास के लिए क्षेत्रीय भौगोलिक परिस्थितियों को समझना और उनके अनुरूप विकास की एक ठोस रणनीति तैयार करना बहुत आवश्यक है, ताकि हर इलाके का समान रूप से तीव्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।

सांस्कृतिक विरासत

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो बी पी सारस्वत ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भारत के मूल नाम, उसकी ऐतिहासिक पहचान और भौगोलिक-सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ में बहुत ही महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने इंडिया के स्थान पर भारत शब्द के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि देश की पहचान, उसकी विविधता और सांस्कृतिक विरासत को गहराई से समझने में भूगोल की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रो सारस्वत ने इस राष्ट्रीय भूगोल सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए सभी आयोजकों, प्रतिभागियों और देशभर से आए भूगोलवेत्ताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन शोध, ज्ञान के आदान-प्रदान और आपसी अकादमिक सहयोग को मजबूत करने का एक बहुत ही सशक्त माध्यम साबित होते हैं।

विशेष संबोधन

समापन समारोह के दौरान मुख्य वक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो शहाब फजल ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में भूगोल की भूमिका पर प्रकाश रखा। उन्होंने देश के समग्र विकास के लिए जीडीपी दर में वृद्धि, गरीबी एवं बेरोजगारी दूर करने तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। बढ़ती जनसंख्या के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सतत विकास की अवधारणा पर भी विशेष रूप से जोर दिया। इसके अलावा विशिष्ट अतिथि कृषि विश्वविद्यालय कोटा की कुलगुरु प्रो विमला डूंकवाल और राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा के कुलगुरु प्रो निमित रंजन चौधरी ने भी अपने प्रेरणादायक वचनों से युवाओं को अचंभित कर दिया।

भविष्य की राह

समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस भव्य भूगोल सम्मेलन के सफल आयोजन से पूरे प्रदेश में शैक्षणिक और अकादमिक गतिविधियों को एक नई दिशा मिली है। तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय समागम ने भूगोल के क्षेत्र में नवीन शोध और सतत विकास की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक मंच प्रदान किया है। तकनीकी सत्रों में रखे गए प्रस्तावों और विशेषज्ञों के सुझावों से आने वाले समय में देश के नीति निर्धारकों को नीतियां बनाने में बहुत मदद मिलेगी। अंत में सभी ने इस भूगोल सम्मेलन की अभूतपूर्व सफलता पर अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को जारी रखने की बात कही।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। भूगोल सम्मेलन और शैक्षणिक आयोजनों से जुड़े सभी तथ्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुरूप हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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