हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और लाल सागर तट पर स्थित ऊर्जा केंद्र पर हमले और बड़ा यमन हूती संघर्ष छेड़ने का दावा किया है।
बड़े पैमाने पर हमले - फाइल फोटो
वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका। यमन के हूती समूह ने यह बड़ा दावा किया है कि उसने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और लाल सागर के तट पर स्थित प्रमुख औद्योगिक व ऊर्जा केंद्र यान्बू को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। हूती-संचालित अल-मसीरा टीवी पर प्रसारित एक आधिकारिक बयान में, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेआ ने यह जानकारी दी है कि इन अभियानों में भारी संख्या में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोनों का भी इस्तेमाल किया गया था। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने वैश्विक और कूटनीतिक गलियारों के बीच मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को एक बार फिर से बेहद गंभीर मोड़ पर ला दिया है। प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि ये दोनों अभियान पूरी तरह सफल रहे और लक्षित स्थलों पर भारी आग भड़क उठी। हालांकि, सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने इन सभी हमलों को नाकाम करने और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है। [1]
सऊदी अरब की राजधानी रियाद में इस घटना के बाद तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं और पूर्वोत्तर हिस्से में हवाई अड्डे के पास घना धुआँ उठता देखा गया, जिसके चलते कुछ उड़ानों के संचालन में भी देरी हुई। सऊदी अधिकारियों ने हमले से पहले ही रियाद के लिए हवाई खतरे का एक कड़ा अलर्ट जारी कर दिया था, जिसे हाल के हफ्तों में बढ़े तनाव के बाद इस राजधानी के लिए पहला बड़ा सुरक्षा अलर्ट माना जा रहा है। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य नागरिकों और नागरिक वस्तुओं को नुकसान पहुँचाना था, और देश की रक्षा बनाए रखने के लिए हरसंभव उचित कदम उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, हूती प्रवक्ता ने नागरिकों को निशाना बनाने के इन तमाम दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह कार्रवाई यमन के क्षेत्रों में हुए तीव्र सऊदी हवाई हमलों के जवाब में की गई है।
इस नए घटनाक्रम ने क्षेत्रीय राजनीति को पूरी तरह से गरमा दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संघर्ष के और अधिक गंभीर रूप लेने की गहरी आशंका जताई जा रही है। विश्लेषकों का यह मानना है कि यदि इस प्रकार के सैन्य हमले लगातार जारी रहे तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और कच्चे तेल की आपूर्ति पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने भी इस क्षेत्र की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है तथा संबंधित पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। मौजूदा हालातों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को अत्यधिक सतर्क कर दिया गया है ताकि किसी भी अनहोनी या बड़ी सामरिक चूक से समय रहते बचा जा सके और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके।
लाल सागर के पास स्थित प्रमुख ऊर्जा केंद्रों और तेल भंडारों पर इस तरह के हमले के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इस प्रकार की हिंसक गतिविधियों की कड़ी निंदा की है और सभी पक्षों से शांतिपूर्ण बातचीत के रास्ते पर लौटने का कड़ा आग्रह किया है। कूटनीतिक स्तर पर मध्यस्थता के प्रयास भी बहुत तेज कर दिए गए हैं ताकि इस संघर्ष को और अधिक फैलने से रोका जा सके। कूटनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि जब तक यमन और सऊदी अरब के बीच मूल राजनीतिक मुद्दों का कोई स्थायी और ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक इस तरह की सैन्य झड़पें और क्षेत्रीय अस्थिरता बनी रहने की पूरी संभावना है।
इस प्रकार, यमन हूती संघर्ष के जरिए मध्य पूर्व की दुनिया में एक नए और खतरनाक दौर की शुरुआत होने जा रही है जिस पर पूरी दुनिया की पैनी नजर लगातार बनी हुई है। आने वाले समय में इसके परिणाम वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस गंभीर संकट को थामने में कितना सफल साबित होता है और क्या दोनों पक्ष युद्धविराम या किसी शांति समझौते की ओर कदम बढ़ाते हैं या नहीं।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यमन और सऊदी अरब के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े इस विषय पर दी गई भविष्य की स्थितियां केवल वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक बयानों को दर्शाती हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी प्रकार के निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।