कोटा के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में छात्र-हित को ध्यान में रखते हुए नए कक्षा-कक्ष निर्माण के कार्य का भूमिपूजन संपन्न हुआ।
कक्षा-कक्ष निर्माण की शुरुआत
कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। कोटा के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, घोड़ाबस्ती में छात्रों के बेहतर भविष्य और शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। यहाँ राउंड टेबल 281 के सहयोग से करीब सत्ताईस लाख रुपये की लागत से चार नए कक्षा-कक्ष निर्माण का कार्य शुरू किया जा रहा है। रविवार को विद्यालय परिसर में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान इन नए कमरों के निर्माण के लिए विधिवत रूप से भूमिपूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक, छात्र और संस्था के पदाधिकारी उपस्थित रहे। इस नई पहल से स्कूल में बुनियादी ढांचे का विकास होगा और विद्यार्थियों को पढ़ाई करने के लिए अधिक जगह तथा आरामदायक माहौल मिल सकेगा।
कार्यक्रम के दौरान राउंड टेबल 281 के चेयरमैन सारांश मित्तल ने बताया कि उनकी संस्था पिछले दस वर्षों से लगातार शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सेवा कार्य कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस नए कक्षा-कक्ष निर्माण के पूरा हो जाने के बाद बच्चों को आधुनिक और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। प्रोजेक्ट कन्वीनर निमिष अग्रवाल, सिद्धार्थ पोद्दार, मुदित गोयल और ऋषि जैन जैसे गणमान्य लोग भी इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुँचे थे। संस्था के सदस्यों ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और अपने सपनों को नई उड़ान दे सकें।
चेयरमैन सारांश मित्तल ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि इन नवनिर्मित कक्षा-कक्षों को विद्यार्थियों की दैनिक आवश्यकताओं और आधुनिक मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले फर्नीचर से पूरी तरह सुसज्जित किया जाएगा। इससे विद्यालय में अध्ययन के लिए पर्याप्त अतिरिक्त स्थान उपलब्ध हो सकेगा और बच्चों को एक बहुत ही बेहतर एवं सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा। उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि उनकी संस्था की ओर से अब तक विभिन्न सरकारी विद्यालयों में बावन से अधिक कक्षा-कक्षों का निर्माण कराया जा चुका है, जिससे हजारों बच्चों को सीधा लाभ मिला है। स्थानीय ग्रामीणों और स्कूल प्रशासन ने संस्था के इस सराहनीय कदम के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त किया है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में इस प्रकार के बुनियादी बदलाव आने से विद्यार्थियों की उपस्थिति में सुधार होता है और उनका मन पढ़ाई में अधिक लगता है। घोड़ाबस्ती के इस विद्यालय में हो रहे कक्षा-कक्ष निर्माण कार्य से न केवल कक्षाओं की कमी दूर होगी, बल्कि शिक्षक भी सुचारू रूप से अपनी कक्षाओं का संचालन कर सकेंगे। स्कूल के प्रधानाध्यापक ने बताया कि लंबे समय से अतिरिक्त कमरों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जो अब राउंड टेबल 281 के प्रयासों से पूरी होने जा रही है। बच्चों और उनके अभिभावकों में इस नए निर्माण कार्य को लेकर भारी उत्साह देखने को मिल रहा है, क्योंकि इससे उनके बच्चों का शैक्षणिक स्तर और अधिक मजबूत होगा।
संस्था के पदाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे जनहित और शिक्षा केंद्रित कार्य निरंतर जारी रखे जाएंगे, ताकि समाज के हर वर्ग के बच्चों तक बुनियादी शिक्षा की रोशनी पहुंच सके। इस प्रकार के सामाजिक सहयोग से सरकारी स्कूलों की तस्वीर धीरे-धीरे पूरी तरह बदल रही है। भूमिपूजन के दौरान पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और सभी ने मिलकर विद्यालय की प्रगति की कामना की। इस पूरे आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब समाज के जिम्मेदार लोग मिलकर काम करते हैं, तो शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा और मजबूती मिल सकती है, जिससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवरता है।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी अतिथियों और विद्यालय परिवार ने मिलकर पौधारोपण भी किया तथा बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में प्रेरित किया। संस्था के सदस्यों ने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में वे स्कूल के अन्य विकास कार्यों में भी पूरा सहयोग करेंगे। इस प्रकार, घोड़ाबस्ती के विद्यालय में शुरू हुआ यह कक्षा-कक्ष निर्माण कार्य स्थानीय शिक्षा क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। इस सफल आयोजन ने क्षेत्र के अन्य लोगों को भी सामाजिक कार्यों में आगे आने के लिए प्रेरित किया है, जिससे समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और कक्षा-कक्ष निर्माण से जुड़ी यह जानकारी सामान्य जनहित और अपडेट के लिए है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।