राजस्थान

राष्ट्रीय कवि चौपाल के मंच पर सजी त्रिभाषा साहित्य की महफिल

राष्ट्रीय कवि चौपाल की 586 वीं कड़ी में प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने जुटकर अपनी रचनाओं और विचारों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

By अजय त्यागी 1 min read
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राष्ट्रीय कवि चौपाल

बीकानेर, राजस्थान। स्वास्थ्य एवं साहित्य संगम के बैनर तले आयोजित राष्ट्रीय कवि चौपाल की 586 वीं कड़ी का आयोजन बेहद भव्य रूप में संपन्न हुआ। आज के इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य विषय विकार से परे साहित्यकार रहा, जिस पर देश भर से आए रचनाकारों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरिदास हर्ष ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में यज्ञाचार्य पं. नथमलजी पुरोहित उपस्थित रहे। इसके अलावा, विशिष्ट अतिथियों में राजेन्द्र स्वर्णकार, सरदार अली परिहार और गणेश कट्टा जैसे कई दिग्गज मंच पर सुशोभित हुए। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ करते हुए रामेश्वर साधक ने कहा कि बांझ वह व्यक्ति भी होता है जो वैचारिक प्रजनन शक्ति या आचरण में शून्य रहता है और जिसकी कथनी व करनी में हमेशा अंतर पाया जाता है।

साहित्यिक विचार

कार्यक्रम के दौरान अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए डॉ. हरिदास हर्ष ने कहा कि एक सच्चे साहित्यकार को सभी प्रकार के विकारों से परे रहकर हमेशा दिव्य गुणों पर अपनी दृष्टि केंद्रित रखनी चाहिए। मुख्य अतिथि यज्ञाचार्य पं. नथमलजी पुरोहित ने अपने क्रांतिकारी उद्बोधन में स्पष्ट किया कि साहित्यकार ही असल मायनों में सभ्यता और संस्कृति का असली प्रहरी होता है। स्वामी वसुंधरा आनन्द महाराज ने अपने पावन प्रवचन में कहा कि साधक को अपनी आवश्यकताओं को हमेशा न्यूनतम रखना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से त्याग, वैराग्य और प्रभु का सानिध्य स्वतः ही प्राप्त हो जाता है। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ. उमा कांत गुप्त ने बताया कि आध्यात्म ही साहित्य का मुख्य पर्याय है और आध्यात्म के माध्यम से साहित्य को तथा साहित्य के माध्यम से आध्यात्म को बेहतरीन अभिव्यक्ति दी जा सकती है।

काव्य प्रस्तुतियां

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न रचनाकारों ने अपनी कविताओं और गजलों से समां बांध दिया। राजेन्द्र स्वर्णकार ने अपनी ओजस्वी रचना प्रस्तुत की, जबकि सरदार अली परिहार ने कहा कि साहित्यकार का लेखन हमेशा अनवरत रूप से अपने उत्तम आचरण के साथ जारी रहना चाहिए। इसके साथ ही डॉ. कृष्ण लाल विश्नोई, रामेश्वर साधक, लीलाधर सोनी, शिव प्रकाश दाधिच, राजकुमार ग्रोवर, कमल किशोर पारीक और महबूब अली देशनोक ने भी अपनी सुरीली रचनाओं से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। इस गरिमामयी आयोजन के दौरान राष्ट्रीय कवि चौपाल समूह की ओर से यज्ञाचार्य पं. नथमलजी पुरोहित एवं स्वामी वसुंधरा आनन्द महाराज का रत्न जड़ित मोतीयन माला, श्रीफल, शॉल और पुष्पमालाओं के साथ आत्मीय स्वागत किया गया।

विशेष उपस्थिति

कार्यक्रम के अंतिम चरण में सिराजुद्दीन भुट्टा, कृष्णा वर्मा, अशोक सोनी और सईद अहमद ने भी अपनी बेहतरीन रचनाएं प्रस्तुत कीं। आज के इस सत्र में कुल चौदह साहित्यिक प्रस्तुतियां हुईं, जिन्होंने उपस्थित सभी लोगों का दिल जीत लिया। इस भव्य आयोजन में राधा किशन सोनी, महेश हर्ष, पवन चड्ढ़ा, धर्मेंद्र राठोड़, छोटू खां, बाबू लाल जांगिड़, सुरेश सोनी, घनश्याम सौलंकी, नत्थू खां, उमेश कुमार सेवग, लीलाधर और श्री कांत आर्यन सहित कई गणमान्य साहित्यानुरागी पूरी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का बहुत ही सुंदर संचालन विवेक वैराग्य और दृष्टांत शैली में रामेश्वर साधक ने किया, जबकि अंत में सभी का आभार व्यक्त करने की जिम्मेदारी राजेन्द्र स्वर्णकार ने निभाई।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। राष्ट्रीय कवि चौपाल और साहित्यिक गोष्ठियों से जुड़ी यह जानकारी सामान्य जनहित और अपडेट के लिए है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

 

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