राजस्थान

विज्ञान नगर जैन मंदिर में स्वाध्याय सभा और संयम पर प्रवचन संपन्न

कोटा के विज्ञान नगर जैन मंदिर में आयोजित स्वाध्याय सभा में सीताराम अग्रवाल ने संयम को सफलता का आधार बताया। 27 सितंबर को क्षमावाणी समारोह होगा।

By अजय त्यागी 1 min read
Twitter Facebook WhatsApp

जैन मंदिर में स्वाध्याय सभा

कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार विज्ञान नगर जैन मंदिर में इन दिनों विभिन्न आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला पूरी तन्मयता के साथ चल रहा है। इसी श्रृंखला के तहत मंदिर परिसर में आयोजित विशेष स्वाध्याय सभा में प्रख्यात वक्ता और सिद्धांत विशारद सीताराम अग्रवाल ने अपने ओजस्वी वचनों से उपस्थित भक्तों को लाभान्वित किया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि संयम ही मनुष्य के जीवन की वास्तविक सफलता और उसकी आंतरिक शांति का एकमात्र मूल आधार है। इस धार्मिक आयोजन में कोटा शहर के कोने-कोने से पहुंचे बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और धर्म लाभ प्राप्त किया।

इंद्रियों पर नियंत्रण

प्रवचन के दौरान सीताराम अग्रवाल ने विस्तार से समझाते हुए कहा कि अपनी इंद्रियों पर सम्यक रूप से नियंत्रण रखना ही असल मायनों में संयम है। उन्होंने बताया कि स्पर्श, रस, गंध, चक्षु और श्रवण इन पांचों इंद्रियों को अपने वश में रखते हुए दर्शन और ज्ञान से परिपूर्ण जीवन जीना ही संयम के प्रमुख और सच्चे लक्षण हैं। वक्ता का कहना था कि यदि मनुष्य का अपनी इन ज्ञानेंद्रियों पर पूर्ण अधिकार हो जाए तो वह जीवन के हर मोर्चे पर आसानी से सफलता हासिल कर सकता है। जैन मंदिर में इस प्रकार के आध्यात्मिक विचार सुनकर वहां मौजूद सभी श्रवणकर्ता मंत्रमुग्ध हो गए और उन्होंने धार्मिक मार्ग पर चलने का दृढ़ संकल्प लिया।

मन और आहार पर संयम

आगे की चर्चा को बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का अपने मन, वचन और आहार पर नियंत्रण स्थापित हो जाए तो उसका जीवन रूपी रथ सही दिशा में आगे बढ़ता हुआ अपनी मंजिल तक पहुंच सकता है। इसके विपरीत उन्होंने चेताया कि संयमहीन जीवन हमेशा अशांति, कलश, दुख, परेशानी, बीमारी, ईर्ष्या और द्वेष जैसी तमाम बुराइयों को जन्म देता है। उन्होंने बहुत ही सुंदर शब्दों में समझाया कि आत्मानुशासन केवल किसी पाखंड या तकरीर तक सीमित धार्मिक जीवन का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति के दैनिक व्यवहार और जीवनशैली को संतुलित बनाने का माध्यम है।

शांति धारा व अभिषेक

मंदिर समिति के मंत्री पी.के. हरसोरा ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इस पवित्र धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मुख्य शांति धारा एवं अभिषेक का सौभाग्य देवेंद्र गंगवाल और मुकेश खटोड़ को प्राप्त हुआ। इस पावन शांति धारा अनुष्ठान में कन्हैया लाल शक्करवाले, अनिल काला, विनोद जैन, विवेक जैन, अनिल बाकलीवाल तथा अरविंद ठौरा सहित अन्य गणमान्य श्रद्धालुओं ने भी पूरी श्रद्धा के साथ सहभागिता निभाई। मंत्रोच्चार और देवदर्शन के इस सुंदर माहौल से पूरा मंदिर प्रांगण पूरी तरह गुंजायमान हो गया और उपस्थित भक्तों ने भगवान के चरणों में शीश झुकाकर सुख-समृद्धि की कामना की।

सुगंध दशमी और झांकियां

संस्था अध्यक्ष राजमल पाटोदी ने बताया कि सुगंध दशमी के पवित्र अवसर पर समाज के श्रद्धालु विभिन्न जैन मंदिरों में पहुंचकर बड़ी श्रद्धा के साथ धूप अर्पित करते हैं। इस विशेष अवसर पर मंदिरों के भीतर जैन दर्शन और उनके इतिहास से संबंधित बेहद आकर्षक व मनमोहक झांकियां भी सजाई जाती हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं। उन्होंने प्रकाश डालते हुए बताया कि यह सुगंध दशमी का पावन पर्व जैन समाज के लिए धार्मिक आस्था और उच्च आध्यात्मिक साधना का बहुत ही महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है, जिसमें हर कोई आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास करता है।

सामूहिक क्षमावाणी समारोह

पाटोदी ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि विज्ञान नगर जैन समाज की ओर से आगामी 27 सितंबर को भव्य सामूहिक क्षमावाणी समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस होने वाले मुख्य कार्यक्रम में समाज की प्रतिभाशाली युवाओं तथा कठिन उपवास करने वाले तपस्वी श्रद्धालुओं का विशेष रूप से सम्मान किया जाएगा। इस आयोजन की तैयारियों से जुड़ी सामूहिक पूजन बैठक में बाबूलाल रेबारपुरा, अनिल ठौरा, पारस धनोपया, सीताराम जैन और राजेंद्र पाटनी सहित समाज के अनेक प्रतिष्ठित लोग उपस्थित रहे। इन सभी के संयुक्त प्रयासों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समाज का यह महापर्व पूरी भव्यता और आपसी भाईचारे के साथ संपन्न हो सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। जैन मंदिर कोटा और धार्मिक आयोजनों से जुड़ी जानकारी पाठकों की जागरूकता के लिए दी गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

#Kota #JainTemple #SugandhDashami #Kshamavani #Jainism #RajasthanNews
Read Full Article on RexTV India