असम में गैंडा संरक्षण और आवास सुरक्षा को लेकर चुनौतियां बढ़ रही हैं। वैश्विक गैंडा संरक्षण में असम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विश्व गैंडा दिवस
तेजपुर, असम। हर साल 22 सितंबर को विश्व गैंडा दिवस (World Rhino Day) मनाया जाता है। आज जब इनके संरक्षण की आवश्यकता सबसे ज्यादा महसूस हो रही है तो हम बात करते हैं असम की। क्योंकि दुनिया का 80 प्रतिशत गैंडा संरक्षण क्षेत्र असम में केंद्रित है, जबकि इसके बावजूद राज्य में जानवरों के प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए संरक्षण चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं। विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर अधिकारियों ने बताया कि असम वैश्विक आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने यहां संजोए हुए है। ब्रह्मपुत्र के बाढ़ के मैदानों, घास के मैदानों और आद्रभूमि के कारण इस प्रजाति के लिए अनुकूल परिस्थितियां मिलती हैं। हालांकि बढ़ती आबादी के साथ ही पर्याप्त और सुरक्षित आवास का निर्माण करना प्रशासन के सामने एक बड़ा और जटिल मुद्दा बनता जा रहा है। [1]
विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक एकाग्रता के कारण इस प्रजाति को सामान्य जोखिमों जैसे बीमारियों और बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, ओरंग राष्ट्रीय उद्यान और पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य में गैंडों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन संरक्षित क्षेत्रों को एक व्यापक नेटवर्क के रूप में आपस में जोड़ना आवश्यक हो गया है ताकि गैंडा संरक्षण की दिशा में दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित की जा सके। बाढ़ के मौसम में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उच्च भूमि और गलियारों का रख-रखाव भी बेहद जरूरी माना गया है।
गैंडा संरक्षण और प्रबंधन के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी को सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। बाढ़ के दौरान कई बार गैंडे मानवीय बस्तियों में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे आपसी तालमेल और सहयोग की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है। संरक्षण का दायरा केवल जंगलों तक सीमित न रहकर जनसामान्य के साथ सह-अस्तित्व की ओर बढ़ रहा है। वन विभाग के सुरक्षा उपायों के साथ-साथ स्थानीय लोगों का समर्थन ही इस वन्यजीव विरासत को सुरक्षित रखने की असली ताकत साबित हो रहा है।
असम में पिछले कुछ वर्षों के दौरान अवैध शिकार की घटनाओं पर कड़ी निगरानी और खुफिया तंत्र की मजबूती से काफी हद तक रोक लगी है। राज्य ने सुरक्षा बलों और वन कर्मियों की मुस्तैदी से संरक्षण के मोर्चे पर ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके बावजूद बदलती परिस्थितियों में सुरक्षा एजेंसियों को हर समय सतर्क रहना पड़ रहा है। तस्करों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन और आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि गैंडा संरक्षण को पूरी तरह से अचूक बनाया जा सके।
आने वाले समय में गैंडा संरक्षण की सफलता केवल आंकड़ों पर निर्भर नहीं करेगी बल्कि स्वस्थ और आपस में जुड़े हुए प्राकृतिक आवासों के विस्तार पर टिकी होगी। सरकार और वन्यजीव विशेषज्ञों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बढ़ती हुई आबादी के लिए पर्याप्त जगह और प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध रहें। इन सभी दूरदर्शी कदमों के क्रियान्वयन से असम में गैंडा संरक्षण को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में आने वाली सभी बाधाओं का सफलतापूर्वक सामना किया जा सकेगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के अंतर्गत दी गई गैंडा संरक्षण से जुड़ी सभी जानकारियां वर्तमान उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।