नीमकाथाना के स्यालोदड़ा में क्रेशर इकाइयों से फैल रहे धूल प्रदूषण से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों ने औद्योगिक इकाइयों की अनुमति पर सवाल उठाए हैं।
औद्योगिक इकाइयों से बढ़ता प्रदूषण
नीमकाथाना, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। नीमकाथाना विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पंचायत समिति पाटन, स्यालोदड़ा क्षेत्र में क्रेशर एवं अन्य औद्योगिक इकाइयों से फैल रहे धूल प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार उड़ती धूल से वातावरण प्रभावित हो रहा है और लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और प्रशासन से सवाल किया है कि क्षेत्र में संचालित प्रत्येक क्रेशर एवं औद्योगिक इकाई के पास Consent to Establish और Consent to Operate की वैध अनुमति है या नहीं। यदि अनुमति जारी की गई है तो उसकी अवधि क्या है और धूल नियंत्रण के लिए निर्धारित उपकरण एवं व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से संचालित हो रही हैं या नहीं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग इन इकाइयों के निरीक्षण, प्रदूषण जांच और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करे। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की वेबसाइट पर भी उद्योग या माइन की Consent या Authorization संबंधी रिकॉर्ड खोजने की सुविधा उपलब्ध है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। क्षेत्र में धूल की परत जमा रहने से स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण को लेकर चिंता बनी हुई है, जिससे आमजन का जीवन प्रभावित हो रहा है और प्रशासनिक स्तर पर भी तुरंत ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
किसान नेता रामरतन यादव ने कहा कि स्यालोदड़ा की जनता लंबे समय से धूल प्रदूषण की समस्या झेल रही है। संबंधित विभाग को मौके पर जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कौन-कौन सी इकाइयां वैध अनुमति से संचालित हैं और प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या व्यवस्थाएं लागू हैं। उन्होंने सवाल किया कि जनता को धूल प्रदूषण से राहत आखिर कब मिलेगी। इस प्रकार की गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को संयुक्त रूप से औचक निरीक्षण करना चाहिए, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके और क्षेत्रवासियों को स्वच्छ हवा मिल सके।
स्यालोदड़ा में संचालित औद्योगिक इकाइयों को किन वैधानिक अनुमतियों के आधार पर चलाया जा रहा है, उनकी निगरानी कौन कर रहा है और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है? ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करने और नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो ग्रामीणों द्वारा भविष्य में और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में कानून और व्यवस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण के नियमों की पालना को सख्ती से सुनिश्चित किया जा सके।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के अंतर्गत दी गई धूल प्रदूषण से जुड़ी सभी जानकारियां वर्तमान उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।