पिछले डेढ़ साल में 13 प्रतिशत की रुपये में गिरावट आना केवल एक अस्थायी घटना है और इसके जल्द ही मजबूत होने की पूरी उम्मीद है।
डॉ. पूनम गुप्ता, डिप्टी गवर्नर, RBI
नई दिल्ली, दिल्ली। पिछले डेढ़ साल में भारतीय रुपये में गिरावट को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है जिससे आम निवेशकों में खलबली मच गई है। देश की अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच वित्तीय जानकारों की सांसें अटकी हुई हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर देश के केंद्रीय बैंक ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बड़ा संदेश दिया है। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, रुपये में 13 प्रतिशत की गिरावट पूरी तरह अस्थायी है और मौजूदा स्तरों से रुपये में जोरदार रिकवरी की खासी गुंजाइश बनी हुई है। [विडियो] [1]
भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने एक हालिया कार्यक्रम में स्पष्ट किया है कि विदेशी मुद्रा बाजार में किसी भी तरह की अस्थिरता से निपटने के लिए बैंक पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय बैंक के पास भुगतान संतुलन के मोर्चे पर किसी भी प्रकार के भारी घाटे की भरपाई करने के लिए पर्याप्त और मजबूत संसाधन मौजूद हैं। पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के कारण मुद्रा पर अनुचित दबाव के चलते रुपये में गिरावट देखी जा रही है, लेकिन इसके पीछे कोई ठोस आधार नजर नहीं आ रहा है। इस परिस्थिति के बीच केंद्रीय बैंक द्वारा रुपये में जोरदार रिकवरी के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाने का पूरा भरोसा जताया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और संघर्ष के थमने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी नरमी आ सकती है। इसके अलावा देश के भीतर वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के लगातार बढ़ते उपयोग और अपने खुद के तेल भंडारों की खोज से आयातित ईंधन पर हमारी निर्भरता तेजी से घटेगी। इन तमाम सकारात्मक बदलावों की वजह से चालू खाते के घाटे में और अधिक कमी दर्ज की जाएगी, जिससे देश की आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत होगी। इस सकारात्मक माहौल के चलते विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये में जोरदार रिकवरी देखने को मिल सकती है जिससे निवेशकों को भारी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।
आने वाले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से पूंजी खाते की स्थिति अधिक अनुकूल होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। भारत की पारंपरिक व्यापारिक ताकत के साथ-साथ हाल ही में हुए कई मुक्त व्यापार समझौतों का सीधा लाभ भी अब अर्थव्यवस्था को मिलने लगा है। देश के सकल घरेलू उत्पाद में निर्यात का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है, जो भविष्य के लिए बहुत ही सुखद संकेत माना जा रहा है। एआई तकनीक और नए व्यापारिक अवसरों का पूरा लाभ उठाकर देश की अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ती रहेगी और आने वाले दिनों में रुपये में गिरावट के स्थान पर जोरदार रिकवरी दर्ज की जाएगी।
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच देश के भीतर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए नीति निर्माताओं द्वारा कई कड़े और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के साथ-साथ विदेशी निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए रिजर्व बैंक लगातार अपनी नीतियों की समीक्षा कर रहा है। जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में बाजार की स्थिति पूरी तरह स्थिर हो जाएगी और निवेशकों को किसी भी प्रकार की घबराहट से बचने की जरूरत है। देश की मजबूत बुनियादी आर्थिक ताकत के दम पर मुद्रा बाजार में रुपये में गिरावट पर लगाम लगेगी और जोरदार रिकवरी सुनिश्चित होने की पूरी संभावना है जिससे हर मोर्चे पर स्थिरता आएगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और विनिमय दरों से जुड़े वित्तीय फैसले लेने से पहले पाठकों को अपने स्तर पर विशेषज्ञ सलाह अवश्य लेनी चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।